Wednesday, December 10, 2014

दिल की बात कविता में.……बिंदु जैसा रूप है तेरा सागर जैसा ज्ञान।



बिंदु जैसा रूप है तेरा सागर जैसा ज्ञान। 
एक तुम्ही भगवान हो बाबा बाकी सब इन्सान।।

जिस घर में रहते हो वो है परमधाम। 
उस समय आते हो जब दुनिया बनती है दुःखधाम।। 

दुःखधाम को सुखधाम बनाना यही तुम्हारा काम। 
सिवाय तुम्हारे कर न सकेगा कोई भी इन्सान।।

बिंदु जैसा रूप है तेरा सागर जैसा ज्ञान। 
एक तुम्ही भगवान हो बाबा बाकी सब इन्सान।।

जिस रथ में आते हो वह भागीरथ कहलाये। 
भोलेनाथ की सवारी वह नंदीगण कहलाये।।

ब्रह्मा तन में आ देते हो हमको ज्ञान। 
खुद ही आकर खुद की तुम देते हो पहचान।।

बिंदु जैसा रूप है तेरा सागर जैसा ज्ञान। 
एक तुम्ही भगवान हो बाबा बाकी सब इन्सान।।

जिस युग में आते हो वो संगमयुग कहलाये। 
आदि मध्य अन्त का राज हमें समझाये।।

राजयोग सिखला के हम को बनाते हो गुणवान। 
वार्ना हम तो रह जाते इस सत्य से अज्ञान।।

ब्रह्मा तन में आ देते हो हमको ज्ञान। 
खुद ही आकर खुद की तुम देते हो पहचान।।

एक तुम्ही धनवान हो बाबा एक तुम्ही गुणवान बाबा। 
एक तुम्ही भगवान हो बाबा बाकी सब इन्सान।।

सुरेश पवार 


Monday, December 8, 2014

दिल की बात कविता में.......स्वर्ग रूप स्वराज में तुम देश मेरा जागने दो।

स्वर्ग रूप स्वराज में तुम देश मेरा जागने दो। 
हे प्रभो, इस हेतु ही वरदान यह भी माँगने दो।।  

चित हो भयमुक्त जिससे और ऊँचा रह सके सिर। 
ज्ञान बाधित हो न जिससे साधना वह साधने दो।।
स्वर्ग रूप स्वराज में तुम देश मेरा जागने दो। 
हे प्रभो, इस हेतु ही वरदान यह भी माँगने दो।।

यह हमारी, वह तुम्हरी, यों विभाजित हो न वसुधा। 
संकुचित अशक्तियों के घोंसलों को त्यागने दो ।।
स्वर्ग रूप स्वराज में तुम देश मेरा जागने दो। 
हे प्रभो, इस हेतु ही वरदान यह भी माँगने दो।।

सत्य की गहरी जड़ों से प्रस्फुटित हों शब्द अपने ।
साधना निज पूर्णता की मत अधूरी छोड़ने दो ।।
स्वर्ग रूप स्वराज में तुम देश मेरा जागने दो। 
हे प्रभो, इस हेतु ही वरदान यह भी माँगने दो।।

निःसत्व रूढाचार के वीरान रेगिस्तान में। 
विमल प्रज्ञा-स्रोत अपना मत भटकने सूखने दो।।
स्वर्ग रूप स्वराज में तुम देश मेरा जागने दो। 
हे प्रभो, इस हेतु ही वरदान यह भी माँगने दो।।

जब विचारों और कर्मो में खिले मन की कली तो। 
बस तुम्हारी प्रेरणा को ही हृदय में खेलने दो।।
स्वर्ग रूप स्वराज में तुम देश मेरा जागने दो। 
हे प्रभो, इस हेतु ही वरदान यह भी माँगने दो।।

गीतकार - रवीन्द्रनाथ ठाकुर 

दिल की बात कविता में। … अमन

 … अमन 


इस समन्दर से सिमट कर आचमन हो जाईये। 
क्या बिगाड़ेगा जगत, खुद में मगन हो जाईये।।
ये जगत तो बांधता है, मोह के जंजाल में 
आप ऊपर जाईये, केवल गगन हो जाईये।
जो गुलों की और खारों की सियासत छोड़कर 
बस महक अपनी लुटाए वो चमन हो जाईये। 
पेहवन, ये पाठ पूजन, सब कथाएँ छोड़कर 
राम तुमको गुन गुनाये, वो भजन हो जाईये। 
दौड़ करके आज तक, कोई वहाँ पहुँचा नहीं 
वो स्वयं आकर मिले, ऐसी लगन हो जाईये। 
क्या मोहम्मद, राम , जीजस वो सभी की रोशनी 
जो कबीरा में रहा, वो बाँकपन हो जाईये। 
मन जहाँ तक साथ है जारी रहेगा ये सफर 
छोड़िये भटकान सारे, बस अमन हो जाईये। 


कवि - प्रमोद 

Wednesday, November 26, 2014

दिल की बात कविता में। यु तो कहना बहुत है

 दिल की बात कविता में।

 यु तो कहना बहुत है 

यु तो कहना बहुत है 
लेकिन क्या कहे और किससे 
अपनों से या परायो से 
जब बात आती है दिल पर 
तब अपना भी तो परया लगे 
यु तो कहना बहुत है

कही दिनों से एक बात 
जुबा पर आती जाती है 
वो बात दिल में कब से 
एक खोना बना रक्खा है 
आपके आने पर कुछ 
याद नहीं आता 
आपके जाने पर वो 
दिल के खोने से निकालता है 
यु तो कहना बहुत है

कल बहुत समय तक 
इसी बात में दुबे रहे 
आज कहना है लेकिन 
श्याम होते ही लगा 
कहने से कोई बात नहीं बनती 
बिन कहे जो मिल जाय 
वो बात ही सही है 
एक चुप सौ सुख 
बात मेरी मन को लगी 
यु तो कहना नहीं अब 
सुनना है सामना है 
बात यही है सच्ची 
जिस में है 
सब की कमाई भाई !!!

रमेश 

Tuesday, November 18, 2014

दिल की बात कविता में..........जीवन बनता है

दिल की बात कविता में..........जीवन बनता है 

जीवन बनता है चिन्तन से 
जीवन बनता है विचार से 
जीवन बनता है संकल्प से 
जीवन बनता है सोच से 
जीवन बनता है भावना से 

जीवन बनता है प्रेरणा से 
जीवन बनता है प्यार से 
जीवन बनता है ईबद्दत से 
जीवन बनता है प्रार्थना से 
जीवन बनता है सृमति से 

जीवन बनता है अनुभव से 
जीवन बनता है कर्म से 
जीवन बनता है संग से 
जीवन बनता है जन्म से 
जीवन बनता है दुःख से 
जीवन बनता है दृस्टी से 
जीवन बनता है परिवार से 
जीवन बनता है पढ़ाई से 
जीवन बनता है संस्कार से 
जीवन चलता है श्वासों से 

रमेश …… 




Wednesday, November 12, 2014

दिल की बात कविता में…………यु साया में राहु आपके


दिल की बात कविता में…………यु साया में राहु आपके




यु साया में राहु आपके 
हर रोज ये कायल आता 
पर देर सबेर कब भुलाए 
ये बहुत कोशिश के बाद भी 
अब तक नहीं समझ आये 
यु साया में राहु आपके 
हर रोज ये कायल आता 

कुछ पल का अनुभव 
हर रोज होता है 
लगता जैसे आप मेरे 
साथ हर पल हर घडी 
पर मै पल दो पल 
के बाद जाने कब भूल 
ऐसा लगे जैसे 
हाथो में कोई पानी भरे 
यु साया में राहु आपके 
हर रोज ये कायल आता

एक जिद्द है मेरी 
तेरी बात भी है सच्ची 
चाहे आये कितने भी 
हलचल पर मैं रहूँगा 
अड़िग आपके भरोसे 
मैं जानता हूँ जिसने 
किया तुझ पर विश्वास 
हुआ है जीत उसकी 
यु साया में राहु आपके 
हर रोज ये कायल आता



Monday, November 10, 2014

Happy Birthday....



उगता हुआ सूरज दुआ दे आपको 
खिलता हुआ फूल खुशबू दे आपको 
हम तो कुछ देने के काबिल नहीं है 
देने वाला हज़ार ख़ुशियाँ दे आपको !!!
हैप्पी बर्थडे , हैप्पी बर्थडे 



हर पल ने कहा एक पल से.… 
पल भर के लिए आप मेरे सामने आ जाओ … 
पल भर का साथ कुछ ऐसा हो ……
की हर पल तुम ही याद आओ ……… 
हैप्पी बर्थडे , हैप्पी बर्थडे 

Thursday, October 30, 2014

दिखाई दिए यूँ कि बेखुद किया........





दिखाई दिए यूँ कि बेखुद किया
हमें आप से भी जुदा कर चले
दिखाई दिए यूँ...

जबीं सजदा करते ही करते गई
हक़-ए-बंदगी हम अदा कर चले
दिखाई दिए यूँ...

परस्तिश किया तक कि ऐ बुत तुझे
नज़र में सभों की ख़ुदा कर चले
दिखाई दिए यूँ...

बहुत आरज़ू थी गली की तेरी
सो यास-ए-लहू में नहा कर चले
दिखाई दिए यूँ...



Movie/Album: बाज़ार (1982)

Music By: खैय्याम 
Lyrics By: मिर तकी मिर
Performed By: लता मंगेशकर


Wednesday, September 24, 2014

दिल की बात कविता में ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,आपकी राहा में हम

आपकी राहा में हम। … 


आपको की राहा में चलना 
यु आसान नहीं था 
पर तुम्हे चलते देखकर चलते रहे हम 

रास्ते देख कर कभी सोचा न था
कि हमें इस रास्ते जाना है 
पर तुम्हे जाते देखकर आगे बढ़ते रहे हम 

ऊँची मंजिल की कभी कल्पना ना थी 
यु उड़ान भरना ख़यालो न था 
पर आपको उड़ते देख, उड़ान भर रहे है हम 

अब लगता है जैसे साथ तो है हम 
पर मेरे और आपके चलने में 
कुछ अहसास और समय का विलंब था 
इस लिये कभी आप आगे,  तो पीछे रह जाते हम

इन्तज़ार उस घडी की आप को भी है 
और हमको भी जहाँ हम दोनों के कदम साथ चले 
मंजिल आये न आये 
पर ख़ुशी इस बात की होगी 
अकेले नहीं अब, साथ साथ है हम 

रमेश 


Tuesday, September 16, 2014

दिल की बात कविता में.................मुस्कुराते रहो

मुस्कुराते रहो  

हर उदासी से नज़रे चुराते रहो 
मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो

इस ग़ज़ल को सदा गुनगुनाते रहो 
मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो

मुस्कराहट का जादू चढ़े जिस के सर 
उसको लगाती सरल ज़िन्दगी की डगर 
उम्र भर इसका जादू जगाते रहो 
मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो

दर्द कोई हो ,हो जाये पल में हवा 
मुस्कराहट है ऐसी प्रभावी दवा 
दर्द को यूँ अँगूठा दिखाते रहो 
मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो

मुस्कराहट ही बस ऐसी मेहमान है 
जिसकी हर दिल की महफिल से पहचान है 
इस से महफिल दिलो की सजाते रहो 
मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो

सब से बेहतर है भाषा ये संसार की 
खुशबू आती है इस से सहज प्यार की 
खुशबू ए इसकी जी भर लुटाते रहो 
मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो

कई चेहरे हो जाते है इस से निखर 
मुश्किलें चाहे जैसे हो जाये बिखर 
चाहे यूँ ही सही बस निभाते रहो 
मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो

सुशील सरित - आगरा 

आपका स्वर है, आपकी है आवाज़.

आपका स्वर है, आपकी है आवाज़, रेडियो मधुबन
करे सुरीला हर पल जो वो साज है, रेडियो मधुबन।
संग इसके खिलो गुनगुनाते रहो
इसको सुनते रहो मुस्कुराते रहो।

सुभ्रपात संग नयी किरण की नयी रौशनी प्यारी
जियो ज़िन्दग़ी भर उड़ान संगीत की दुनिया न्यारी
मेरा गॉव, मेरा अंचल सजाते रहो
इसको सुनते रहो मुस्कुराते रहो।

रिदम ऑफ़ लाइफ का सुनहरा ताज,
रेडियो मधुबन करे सुरीला हर पल जो वो साज
अपनी बोली अपनी भाषा, ख़ुशी के नगमे गाये.
दुनिया एक अनेक आवाज़े, समय की माँग सुनाये
धरती धोरा री रंगत खिलाते रहो
इसको सुनते रहो मुस्कुराते रहो।

कैरियर ऑप्शन का भी खोलता राज
रेडियो मधुबन करे सुरीला हर पल जो वो साज
खूब तराने नये पुराने, युथ जंक्शन झिलमिल
वन्दे मातरम गाये आओ हम सब रहे हिलमिल
स्वास्थ अपना भी सुनकर बनाते रहो
इसको सुनते रहो मुस्कुराते रहो।

परमात्मा चिन्तन का अन्दाज़
रेडियो मधुबन करे सुरीला हर पल जो वो साज

आपका स्वर है, आपकी है आवाज़, रेडियो मधुबन
करे सुरीला हर पल जो वो साज है, रेडियो मधुबन।
संग इसके खिलो गुनगुनाते रहो
इसको सुनते रहो मुस्कुराते रहो।

सुशील सरित - आगरा

Tuesday, September 9, 2014

B.K.Commentaries................................Self Motivation.

मैं मास्टर गणपति हूँ। …

ओम शान्ति

गण का अर्थ है पवित्र और पति का अर्थ है स्वामी !..... पवित्रता में ही सब कुछ समाया हुआ है पवित्रता ही नवीनता है। स्वामी बनना है  तो पवित्रता को धारण करना होगा और पवित्रता को धारण करना है तो गहन शान्ति में खो जाना होग अपने नीज़ स्वरूप में। …

तो चलिए अपने घर शांतिधाम में जहाँ से हमें शान्ति की प्राप्ति होगी। शांतिधाम ही हम आत्माओं का असली घर है। वही से मेरा आना और फिर जाना है। और वही अगम निगम का धाम है।

मैं अपने मन को कुछ समय लिए संसार की बातों अलग करते हुवे

शान्ति की अनुभूति के लिए मन और बुद्धि से शान्तिधाम की ओर उड़ान भर रहा हूँ। …

सूर्य, चाँद, सितारोँ से पार परमधाम की और जा रही हूँ। …

जैसे जैसे ऊपर जा रही हूँ।  जीतना ऊपर जा रही हूँ उतना ही ये संसार छोटा होता जा रहा है

अब मैं आत्मा बहुत ऊपर आ  गयी हूँ। … ये संसार ये धरती एक गेंद की तरह दिखाई दे रहा है। ....

अब मैं आत्मा और ऊपर परमधाम में पहुँच गयी हूँ। .... धरती , देह और देह के सम्बन्ध सब भूल गए है। …

अब मुझे चारो ओर प्रकाश ही प्रकाश दिखाई रहा है। … लाल सुनेहरा प्रकाश। ....

बहुत शान्ति है।  न कोई आवाज़ है  न कोई हलचल जैसे सब कुछ शान्त है। … सुन्न अवस्था है

डेड साइलेंस है। .... मेरी आत्मा शान्ति से भरपूर हो  रही है। … इस दिव्या  परलोक में  एक बहुत ही सुन्दर

लाल प्रकाशमय  ज्योति है। … उस ज्योति से शान्ति की किरणे निकल निकल कर मुझ आत्मा में

प्रवेश कर रही है। ……  ये अनोखा अलौकिक मिलन मुझ आत्मा की जन्म जन्मांतर की थकान दूर

कर रही है।................. मैं आत्मा कही जन्मो के पाप व बोझ से मुक्त हो रही है। ..........

मैं आत्मा इस अनुभव को आपने साथ सदा बनाये रखूँगा। … वो मिठे परमात्मा मेरे प्यारे बाबा

आपका दिल से शुक्रिया....  शुक्रिया ....... शुक्रिया !!!

मैं आत्मा एक नयी चेतना और एक नयी शक्ति के साथ बाबा ( परमात्मा ) का शुक्रिया करते हुवे

वापस अपने कर्म भूमि पर अवतरित हो रही हूँ। ……………

परमधाम से नीचे , सितारोँ से नीचे। … धीरे धीरे चाँद से नीचे और सूर्य से नीचे उतर रही हूँ। …

मैं आत्मा आपने कर्म भूमि की ओर आ रही हूँ अब मुझे धरती एक गेंद की तरह दिखाई देने लगा है

मैं जैसे जैसे नीचे आ रही हूँ उतना ये धरती बडा बड़ा बनता जा रहा है। …

अब में आत्मा अपने शरीर में भृकुटि के मध्य में अपने सिंहासन पर विराजमान हो गयी हूँ

मैं हर कर्म साक्षी होकर दिव्य गुणों से युक्त होकर पवित्र मनसा से करुँगी। …

ओम शांति ओम शांति ओम शांति





Monday, September 8, 2014

दिल की बात कविता में ...........वो माया आपने धमाल कर दिया।

वो माया आपने धमाल कर दिया। 

हमारा सारा जीवन आपने दुःख हाल कर दिया 
हम तो सुल्जन में उलझाया आकर आपने 
वो माया आपने धमाल कर दिया। 

हम तो थे जगे हुवे आकर सुला दिया आपने 
तेरी कड़वी दृष्टी ने हमको कंगाल कर दिया 
वो माया आपने धमाल कर दिया। 

हम तो थे उजाले में किया अँधेरा आपने 
आकाश के पुंछी को दिया पिंजरा आपने 
आपकी अशुभ आशिष ने हमको परेशान कर दिया 
वो माया आपने धमाल कर दिया। 

हमारा आधा कल्प बिगाड़ा माया तेरी याद ने 
हमें बिलकुल ही दुःखी बनाया माया तेरे पांच विकार ने 
आपकी अज्ञानता ने हमें खुदा और खुद से दूर कर दिया 
वो माया आपने धमाल कर दिया। 



Tuesday, September 2, 2014

B.K.Commentaries................. High Spiritual Thoughts.

ओम शान्ति 

मैं मास्टर प्रथम पूजनीय आत्मा हूँ। 

हम सब ये जानते  है कि किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले श्री गणेश जी की पूजा होती है। गणेश जी को दिव्या बुद्धि प्राप्त थी। वह हर कार्य बहुत ही सुन्दर और विधि पूर्वक करते थे। उनके जीवन का एक प्रसंग बहुत ही प्रसिद्ध है। जब कार्तिक और गणेश जी को विश्व भ्रमण की बात कही गयी तो गणेश जी ने बुद्धि से काम लिया और वो अपने माता पिता को बीच में बिठाकर उनका चक्र लगया। और कहा मेरे लिए तो आप ही मेरी दुनिया है आप के बिना मैं कहा विश्व में आता। इसलिए गणेश जी को बुद्धि का देवता कहा जाता है। 

गणेश जी के जीवन की हर बात हमें साद गुणों से जोड़ता है साद मार्ग पर चलने के लिए प्रेरणा देता है। 
और उनका एक गयन भी है भक्ति में गाते है।' गणपति आयो बाबा रिद्धि -सिद्धि लायो ' इस का सही अर्थ ये है कि विधि से सिद्धि प्राप्त होता है। …………… 

वर्तमान समय सब मनुष्य आत्माओं में पांच विकार है। जिस के कारण मनुष्य दुःखी है। जब सब मनुष्य दुःखी हो तो दुःख से कैसे छूटे कौन छुड़ायेगा ? ये सवाल उठेगा। इस का विधि येही है। सभी आत्माओं के पिता परमात्मा ही एक ऐसा है। जो सदा पावन है। सुख -दुःख से न्यारा है। वाही दुःख हरता सुख करता है। उसी की याद से उन्हीं से बुद्धि का कनेक्शन जोड़ने से हम आत्मा दुःख से मुक्त हो सकते है। वही दिव्या बुद्धि के दाता है। 

जिनसे आज से पांच हज़ार साल पहले गणेश जी ने भी दिव्या बुद्धि पायी थी।  उन्हें विधि पूर्वक याद कर। 

तो क्यों न हम भी आज इसी विधि को अपना कर सिद्धि प्राप्त कर ले। ………… 

तो चले ………  आज हम और आप फिर से अपने को आत्मा समझ उस परमात्मा को याद करेंगे। …………

अपन को संसार की बातों से अलग कर स्वम् को आत्मा निश्चय कर। ………मन और बुद्धि के संकल्प द्वारा परमधाम की ओर उड़ान भरें। …

मैं आत्मा इस आवाज़ की दुनियाँ से दूर सूरज, चाँद , सितारों से पार पहुँच गयी हूँ। … जहाँ बहुत शान्ति है चारों ओर प्रकाश ही प्रकाश है। इस प्रकाशमय अलोक में प्यारे बापदादा मेरा स्वागत कर रहे है। मैं आत्मा बापदादा की गोद में पहुँच गयी हूँ। बापदादा का स्नेह मुझ आत्मा को तृप्त कर दिया है। मैं आत्मा अतीन्द्रिय सुख में खो गयी हूँ। ................... 

बापदादा के साथ मैं आत्मा एक ओर उड़ान भरते हुवे परमधाम में पहुंच गयी हूँ जहाँ न आवाज़ है न संकल्प बस  डेड साइलेंस है। ……………… मेरी आत्मा परमधाम में परमात्मा के मिलन में डूब गयी है। 

बिन्दु रूप अवस्था में खो गयी है। बीज रूप में ठीक गयी है। ...................... 

परम शान्ति में खो गयी है। ............. शान्ति , शान्ति और शान्ति।      ( कुछ देर इसी अवस्था में रहे )

अब मुझ आत्मा को सच्ची शान्ति का एहसास हो चूका है। शान्ति में ही सब कुछ है। शान्ति ही शक्ति का आधार है।  शान्ति नहीं तो कुछ भी नहीं , शान्ति से ही हर कार्य की सुरवात होती है। शान्ति ही शुभ है शान्ति ही विधि है शान्ति से सिद्धि मिलती है। इस लिए कहा है, ओम में सब कुछ है। याने ओम माना आत्मा और आत्मा का स्वधर्म है शान्ति इसलिए स्वधर्म में सुख है। 

मैं आत्मा अब धीरे धीरे परमधाम से निकल कर अपने शरीर में भृकुटि में पहुँच गयी हूँ। में संकल्प करती हूँ 

मैं हर कार्य शान्ति में रहकर करुँगी ………अपने स्वधर्म को याद करते हुवे कर्म करुँगी। …

    …ओम शान्ति शान्ति  शान्ति 


Monday, September 1, 2014

B.k. Commentaries.....................Self Motivations.

मैं मास्टर गणेश हूँ। …

 ओम शांति 

वैसे देखा जाय तो गणेश जी महीमा बहुत है उनके स्वरूप एक अलंकारी स्वरुप है उनके चहरे की अकृति गजमुख की है और पेट को लंबोदर कहते है और इन सब के बाद भी उनका वाहन एक चूहा है। …

इन सब बातों को देखने के बाद जरूर चिन्तन चेलगा और ये एक सुन्दर अध्यात्मिक चिन्तन का विषय है। 

. तो चलो कुछ देर के लिए हम इस आध्यात्मिक चिंतन में खो जाते है। … Music …। 

गणेशजी याने एक गुणवान व्यक्तिव की छवी का प्रतिक है हर अंग एक विशेष गुण और शक्ति का प्रतिक है। 
आज उनके पेट याने जिसे लंबोदर कहते है। ये समाने की शक्ति का प्रतिक है। 

गणेश जी को कोई भी बात बताने से वह बात उनके अन्दर समा जाता वो किसी और को कभी नहीं बताते। 

इस लिए उनके इस गुण के कारण उन्हें लंबोदर के नाम से याद भक्ति मार्ग में आज भी किया जाता है। 

और आज से पांच हज़ार साल पहले गणेश जी ने ये गुण और शक्ति परमात्मा से पाया था। 

तो क्यों न आज में भी और आप भी इस शक्ति को परमात्मा से पा ले  ................... 

तो चलो। ………… अपने मन और बुद्धि के विमान द्वारा इस पांच तत्वों से पार परमधाम की ओर 

आकाश से परे नीले बादलों के पार। ………………… 

शुक्ष्म लोक मैं जहाँ प्यारे बाबा हमारा इंतज़ार कर रहे है। ……………… 

मैं आत्मा इस संसार में अलग अलग नाम रूप से पाठ बजा कर वर्तामन में इस रूप में हूँ।  अब मुझे इस बात 

का ज्ञान हो गया है। में आत्मा परमधाम से आकर यहाँ पर पाठ बजाया है।  अब फिर से परमधाम जाकर 

शक्ति प्राप्त कर देव स्वरूप बनना है।  और फिर पाठ बजाना है।  मेरा ही गायन और पूजन अब तक चल रहा 

है।  मुझे सब कुछ याद आ गया है।  ……… प्यारे बाबा आपका  सुक्रिया मिठे बाबा आपका सुक्रिया। …

मैं आत्मा इस आवाज़ की दुनिया से दूर नीले आकाश की ओर मन और बुद्धि से उड़ान करते हुवे। …

बहुत ही ऊपर पांच तत्वों से पार शुक्ष्म लोक में पहुँच गयी हूँ। 

यहाँ चारो और शांति ही शांति है।  प्यारे बापदादा मेरा बाहें पसारे मेरा स्वागत कर रहे है।  ऐसा लग रहा है जैसे 

बापदादा बस सिर्फ और सिर्फ मेरा ही इंतज़ार में खड़े है मैं उनसे मिलकर अलौकिक आनन्द में खो गया हूँ 

मेरे अंदर कोई शब्द नहीं है।  इस रूहानी प्रेम का , इस रूहानी प्यार का किन शब्दों में वर्णन करू। ................... 

बस दिल  कहता है बाबा तुम्हें देखता राहु। ................( गीत की कुछ लाइन सुना सकते है )

अब बापदादा मुझे कहा रहे है , - " आओ मेरे प्यारे बच्चे आओ तुम्हीं मेरे गणेश स्वरूप बच्चे हो तुम्हीं ज्ञान स्वरूप मेरे बच्चे हो तुम्ही मेरे मास्टर शक्तिवान बच्चे हो। … आओ आओ आपका स्वागत है " कहते हुवे बाबा मुझे अपने साथ लेकर चलने लगे और ऊपर की तरफ। ……… और जैसे ही मेरा हाथ बाबा ने पकड़ा मैं अशरीरी बन गया 
मैं बिन्दु स्वरुप में समां गया। मैं एक लाइट और माइट में खो गया। 

कुछ देर इस आवस्था में डूबे रहे………………… 

में आत्मा भरपूर बन गया हूँ शक्ति से भरपूर बहुत हल्का महसूस कर रही हूँ।   शान्ति की शक्ति से भरपूर। ................... 

मुझे  याद आ गया। .… हाँ हाँ में ही मास्टर गणेश हूँ।  मेरा ही गायन पूजन वर्तामन में हो रहा है।  ये शक्ति 

और ऐसा गुणवान  बनाने वाले कोई और नहीं वो मेरे अलौकिक पिता परमात्मा शिव बाबा है। 

शिव बाबा आपका दिल से धन्यवाद , सुक्रिया बाबा मैं अपने इस पवित्र स्वरूप में रहकर श्रेष्ठ कर्म करुँगी 

सुक्रिया बाबा सुक्रिया बाबा 

ओम शांति ओम शांति ओम शान्ति. …………  





Friday, August 15, 2014

ओह दूनिया के रखवाले...................

भगवान... भगवान...भगवान...भगवान..
ओह  दूनिया के रखवाले
सुन दर्द  भरे मेरे नाले
सुन दर्द  भरे मेरे नाले (ओह दूनिया)

आश् निराश के धो रंगों से
दूनिया तू ने सजाई
नय्या संग तूफान बनाया
मिलन के साथ जुदाई 
जा देखलिया हर जाई
ओह..लूट गयी मेरे प्यार की नगरी
अब तो नीर बहाले (2)
ओह........अब तो नीर बहाले... (ओह दूनिया)

आग बनी सावन की बरखा
फूल बने अंगारे
नागिन  बन गयी रात सुहानी
पत्थर  बन गये तारे
सूब टूट चुके हैं सहारे
ओह...जीवन अपना वापस लेले
जीवन देने  वाले (ओह दूनिया)

चाँद को दूँदे पागल सूरज
शाम को ढूंढे  सवेरा
में भी दूंडू उस प्रीतम को
हो ना सका जो मेरा
भगवान भला हो तेरा
ओह..किस्मत फूटी आस ना टूटी 
पाव में पड़ गये छाले
ओह दूनिया के रखवाले

आह.....आ.....आह.....
महल उधास और गलियाँ सूनी
चुप चुप हे दीवारें 
दिल  क्या उजड़ा दूनिया उजड़ी
रूट गयी हे बहारे
हम जीवेन कैसे गुजारे 
ओह..मंदिर गिरता फिर बन जाता....
दिल  को कौन सम्भाले 
ओह दूनिया के रखवाले
सुन दर्द  भरे मेरे नाले
सुन दर्द  भरे मेरे नाले
ओह दूनिया के रखवाले
रखवाले.....
रखवाले.....
रखवाले..... 

फ्लिम - बैजू बावरा 
म्यूजिक डायरेक्टर - नौशाद 
सिंगर - मोहम्मद रफ़ी 


          

Tuesday, August 12, 2014

परमात्मा शिव के कर्तव्य




सभी आत्माओ को ज्ञान दिया इसलिये परमात्मा शिव को ज्ञान का सागर कहा जाता है
सभी आत्माओं को गुणवान बनाते है इसलिये परमात्मा शिव को गुणों का सागर कहते है 
सभी निर्बल आत्माओं को शक्तिवान बनाया इस लिये परमात्मा शिव को सर्व शक्तिवान कहा जाता है 
सभी आत्माओं को  सुख का संसार रचा इसलिये  परमात्मा शिव को सुख का सागर कहा जाता है 
सभी आत्माओं को शान्ति देते है इसलिये परमात्मा शिव को शान्ति का सागर कहा जाता है 
सभी दुःखी अशान्त आत्माओं को आनन्द देते है इसलिये परमात्मा शिव को आनन्द का सागर कहा जाता है
सभी अपवित्र आत्माओं को पवित्र बनाते  है इसलिये परमात्मा शिव को पवित्रता का सागर कहा जाता है
सभी आत्माओं को अमर बनाते है इसलिये परमात्मा शिव को अमरनाथ का सागर कहा जाता है
सभी आत्माओं को सोमरस पिलाते है इसलिये परमात्मा शिव को सोमनाथ कहा जाता है
सभी आत्माओं को पशु तुल्य से हिरे तुल्य बनाते  है इसलिये परमात्मा शिव को पशुपतिनाथ कहा जाता है
सभी आत्माओं को मुक्ति और जीवन मुक्ति देते है इसलिये परमात्मा शिव को मुक्तेश्वर कहा जाता है
सभी आत्माओं का पिता निराकार राम है इसलिये परमात्मा शिव को रामेश्वर कहा जाता है
सभी आत्माओं को काटो से फूल बनाया है इसलिये परमात्मा शिव कोबाबुलनाथ कहा जाता है
सभी आत्माओं को काल के पन्जे छुड़ाते है इसलिये परमात्मा शिव महाकाल कहा जाता है
सभी आत्माओं को परूहानी प्रेम देते है इसलिये परमात्मा शिव को प्यार का सागर कहा जाता है
सभी आत्माओं को सत्य ज्ञान देते है इसलिये परमात्मा शिव को सत्यम शिवम् सुन्दरम कहा जाता है
सभी आत्माओं को पत्थर बुद्धि से पारस बुद्धि बनाते है इसलिये परमात्मा शिव को पारसनाथ कहा जाता है
सभी आत्माओं को तीनों लोकों का ज्ञान देते है इसलिये परमात्मा शिव को त्रिलोकीनाथ कहा जाता है
सभी आत्माये परमात्मा को कहीं भी कभी भी याद कर सकते  है
                                              इसलिये परमात्मा शिव को  सर्व्यापी या कण कण में कह दिया  है 



Saturday, August 2, 2014

दिल की बात कविता में........... .... … पंख

 पंख

प्रेम कहाँ अब जीवन में
स्नेह प्यार का सत्कार 
कहाँ अब समाज में 
एक ही घर में रहते 
सब मिलकर पर 
वो  प्रेम सत्कार 
कहाँ अब जीवन में 

सरहदें अब आसमान तक है 
जमी तो जमी अब 
आसमा की हदें बना रहे है लोग 
वो प्रेम सत्कार 
कहा अब जीवन में 

राजसत्ता की पकड़ में 
सत्य - वचन कहाँ 
अब मानव के जीवन में 
वो प्रेम सत्कार 
कहाँ अब जीवन में 

फूल, बाग, बागीचे 
खरीदने वालों के हाथ 
खुशबु ,महक ,सतगुण 
कहाँ उनके जीवन में 
वो प्रेम सत्कार 
कहाँ अब जीवन में 

रात दिन मैफिल 
सजाने वालों की इस दुनिया में 
काव्य का चिंतन मनन 
कहाँ है इनके जीवन में 
वो प्रेम सत्कार 
कहाँ अब जीवन में 

आधुनिक युग में मशीनों 
की कल कल आवाजो में 
वो मन की उड़न कहाँ 
वो प्रेम सत्कार 
कहाँ अब जीवन में 

जप तप से निकरेगा 
 मन वचन कर्म 
 कर तू अब ईबादत 
उस परमात्मा की 
समय की यही पुकार 
तभी होगा 
वो प्रेम सत्कार 
सब के जीवन में। 

Saturday, July 19, 2014

दिल की बात कविता में। …………… .....................आँखे


ये आँखे बोलती है। 
कहती है दिल की बात 
किसी की आँखों ने दी 
एक नयी ज़िन्दगी मुझे
तो किसी की आँखों ने 
छीन ली ज़िन्दगी मुझ से 
ये आँखे बोलती है। 


किसी की आँखों में गम 
किसी की आँखों में ख़ुशी 
किसी की आँखों में सपनें 
ये आँखे बोलती है। 

किसी की आँखों में यादें 
किसी की आँखों में उमीदे 
किसी की आँखों में अरमान 
ये आँखे बोलती है.

उनकी आँखों में देख आँसू 
दिल मेरा भी पिगल गया 
सहस, हिम्मत, आक्रोश 
मेरे भी दिल में जगे थे 
पर उनके आँसू नहीं पोच सके 
ये आँखे बोलती है। 

इन आँखों से है ये दुनिया 
आँखे नहीं तो दुनिया नहीं 
फिर भी कौन करता 
कदर इन आँखों की 
जिन आँखों में सदा 
बहता था निश्छल निर्मल प्यार 
आज उन्हीं आँखों में है 
मोह, माया, स्वार्थ और फरेब 
ये आँखे बोलती है। 


समुन्दर में जो तूपान आते 
वो कुछ समय के बाद रुख जाते 
पर इन आँखों में जब आंसू बहते है   
तो ये भी कोई समुन्दर से कम नहीं 
और इस तूफान को 
शयद ही कोई रोक पाये 
ये आँखे बोलती है। 

ये दोस्त आओ मिलकर 
करे बस एक ही फरियाद 
ये खुदा कर दे मेहर इतनी  
जिन्हे दी है आँखे 
उन्हें कभी आँसू न दे 
बस एक येही है आरजू 
ये आँखे बोलती है। 


Thursday, July 17, 2014

दिल की बात कविता में। ……............. अब रोज कुछ बदलना है।





कुछ बाते नयी कुछ विचार नये 
सुन कर लगा  
कुछ बदलाव करेंगे जरुरु 
अब रोज कुछ बदलना है। 

पत्नी मेरी मुझ से आगे 
निकल गयी इस कार्य में। 
वो रोज ज़ेवर बदलती 
और कभी तेवर बदलती।  
अब रोज कुछ बदलना है। 

देश में भी इस बीच 
काफी बदलाव देखे हमने 
कभी दंगे, कफ्र्यू ,हड़तालें 
तो कभी रिक्शा, टैक्सी, रेल बंद। 
अब रोज कुछ बदलना है। 

हमने बहुत कोशिश की 
बदलने की पर 
अपने अन्दर देख कर 
सोच चला अंतर मन में बदलाव नहीं
तो बाहर के बदलाव से कुछ नहीं 

कुछ बाते नयी कुछ विचार नये 
सुन कर लगा  
कुछ बदलाव करेंगे जरुरु 
अब रोज कुछ बदलना है। 

Saturday, July 12, 2014

दिल की बात कविता में। …… उसने आवाज़ दिया मुझ को



उसने आवाज़ मुझ को दिया  
वो आवाज़ जो मेरे जीवन में साज़ भर दिया 

अपने तो सुल्जे प्रश्नों में ही उल्जा दिया 
उसने बिना पूछे ही मेरी हर बात सुलजा दिया 

रस्ते में मेरे जाने कितने अँधेरे थे 
उसने मेरी आँखों में एक नयी रोशनी भर दिया 

मैं तो दिन के उजाले में भी डर जाता 
उसने अँधेरे में भी अकेला चलना सीखा दिया 

अजब सी बात थी उस में 
लाख कोशिश के बाद भी 
वो कही अदृश्य है आज भी। .... 

उसने आवाज़ मुझ को दिया  
वो आवाज़ जो मेरे जीवन में साज़ भर दिया 


Happy Guru Poornima 
Rj Ramesh

Tuesday, July 8, 2014

दिल बात कविता में .......... उसकी साहस और विश्वास में ताकत है।

  उसकी साहस और विश्वास में ताकत है। 

 आदमी मेहनत करना जानता  है। 
 धरती माँ की गोद से सोना निकालना जानता है। 
 उसकी साहस और विश्वास में ताकत है। 

वो आसमान के रंग देख कर 
बदलाव करता है रुक मौसम का जानता है 
उसकी साहस और विश्वास में ताकत है। 

वो अब चिट्टी क्यों लिखे परदेश से 
दिन-रात जब उनका ही ख़याल रखता है। 
हर पल यादों का दीपक दिल में जलता है। 
उसकी साहस और विश्वास में ताकत है। 

वो जानता है आज जो दुरी है। 
कल मंगल मिलन का ये निशान है।  
आज वीरान है कल खलियान है। 
आज दुःख कल सुख ये जानता है।
उसकी साहस और विश्वास में ताकत है।


Rj Ramesh

दिल की बात कविता में। … …… चाँद को निकलते देखा !



कड़ी धूप और ढलती श्याम 
के बाद हमने आसमान में 
चाँद को निकलते देखा ! 

हर सोलह में रूप बदलते देखा 
कभी हल्का सा रेशम की डोर 
तो कभी एक गेंद की तरह 
हमने चाँद को निकलते देखा !

यु आसान नहीं कुछ पाने को 
यु मुश्किल भी नहीं कुछ पाने को 
ज़िन्दगी वक्त के साथ चलती है 
रंग बदल बदल कर जैसे 
हमने चाँद को निकलते देखा !

यु चाँद भी एक सा नहीं रहता 
कभी बढ़ते हुवे तो कभी घटते हुवे 
वक्त के साथ रंग बदलते हुवे 
कभी बादलों में छुपते हुवे 
हमने चाँद को निकलते देखा !

बस समझ लो जीवन के सार को 
सुख और दुःख में अपने रंग न बदले 
ये तो आने और जाने है 
वक्त के साथ जैसे बदलता है चाँद 
हमने चाँद को निकलते देखा !


Rj Ramesh

दिल की बात कविता में। …अन्तर मन में देख ज़रा



जब जब तेरी बाते सुनता हूँ 
मेरा अन्तर मन शुद्ध हो जाता है 
दिल बिना सोचे ही कहता है 
अन्तर मन  में देख ज़रा

सांसों की इस माला में 
जब तेरी याद बस जाती है 
हर सांसों साँस को सुकून मिलता है 
दिल कहता है अब  
अन्तर मन  में देख ज़रा

कही जन्मो से भटकता रहा 
जब मिला तुझ से 
सारी थकान मिट गयी पल में 
और हो गया दर्शन चारों धाम के 
दिल कहता है अब 
अन्तर मन  में देख ज़रा

रावण वाली लंका को ढूंढ़ता था 
अब मैं ने जाना वो बाहर नहीं 
वो तो मेरे अंदर छुपा है 
अब न कोई गम किसी बात का 
हर बात की सलाह है तू 
तुझे पाकर मैंने पाये तीनों लोक 
दिल कहता है अब 
अन्तर मन  में देख ज़रा  

मन ही माया मन ही पूजा 
मन का ही खेल सब रे 
मन को करो अब प्रभु अर्पण 
हो जाओ मन जीत 
बनो अब जगत जीत 
दिल कहता है अब 
अन्तर मन  में देख ज़रा

Rj Ramesh

Monday, July 7, 2014

दिल की बात कविता में …… आँखों ने देखा है



आज वासुदेव कुटुंब की बात होती है 
पर आँखों ने देखा है यहाँ 
परिवारों को बिखरते हूवे 

दोस्ती की दास्तान सुनाये जाते है 
पर आँखों ने देखा है यहाँ 
एक दोस्त ही दोस्त का 
जानी दुश्मन बनते हूवे 

लैला मजनू  हीर रांझा की 
प्रेम कहानी सब सुनाते है 
पर आँखों ने देखा है 
जो अपने को प्रेमी कहते थे 
वही समय साथ चलते 
अब अपना घर बसा बैठे है 

वीर जवानों की अक्सर अमर 
गाथा स्कूलों में हम सुनते आये है 
पर आँखों ने देखा है 
वीर की वर्दी पहन कर भी 
देश में देश के लोगों को 
बन्दुक बेचते हूवे 

सुना है एक संत को 
आत्मा सम्मान पे बात करते हुवे 
और आँखों ने देखा है 
उसी संत को आत्मा ग्लानि में 

Rj Ramesh.....

Sunday, July 6, 2014

दिल की बात कविता में। .... हैलो क्या बात है !



हैलो क्या बात है ?
किस बात से काफा हो 
अपने ही कारोबार में 
उलजे हो या कोई और बात 
कुछ तो कहो मेरे यार 
हैलो क्या बात है ?

आज याद की डोरी से 
तुम्हे याद से बंधाने की 
कोशिश की 
शायद इस का अहसास 
होगी तुम्हे भी 
कुछ तो कहो मेरे यार 
हैलो क्या बात है ?

चलो मेरे दोस्त 
जैसे भी जहाँ भी हो आप 
आपको मिले सफलताएं हज़ार  
जीत हरदम आपकी ही हो 
येही दुवा करते हम हर बार 
कुछ तो कहो मेरे यार 
हेलो हेलो ओके ओके 
आप नहीं बोल रहे है 
कोई बात नहीं लेकिन 
ये मेरी है आखिरी बात 
खुश रहिये और
ख़ुशी बाँटिये और 
यही ख़ुशी आपकी 
ख़ुशी बढ़ाएगी !!!

Saturday, July 5, 2014

दिल की बात कविता में... … मैं अंजाना !

दिल की बात कविता में... … मैं अंजाना !

कुदरत की खुदाइ 
दिलों की दूहाइ !
जब होता है 
सब के अन्दर 
सब के लिये 
निस्वार्थ प्यार 
तब बरसे बीन 
बदल ये बरसात 
कुदरत की खुदाइ 
दिलों की दूहाइ !

इला इलाही का 
देखो ये आलम 
कैसे उसने भी 
सजाया इस 
दुनिया का रूप 
जो रहता नहीं 
इस दुनिया में 
और जिसे रहने 
दिया इस दुनिया में 
वो कुछ भी नही 
जाने इस दुनिया 
के बारे में..... 
कैसे होती है 
कुदरत की खुदाइ 
दिलों की दूहाइ !

पर अनोखा है 
ये खेल उसका 
हर चीज का है 
एक ही गुण 
सब को इस 
चक्र में है फिरना 
चाहे राजा हो 
या रंक 
ये चक्र कभी न 
रुकता और 
सब को मिलता 
सुनेहरा मौका 
यहाँ  पर आने 
और जाने का 
पर बहुत कम 
ही इस चक्र को 
जाने इस का आदि 
और अंत क्या है 
कैसे होती है 
कुदरत की खुदाइ 
दिलों की दूहाइ !






Friday, July 4, 2014

दिल की बात कविता में…………तुम सवरते रहना।

तुम सवरते रहना।  


श्याम की तरह तुम सवारना 
सुबह की तरह तुम चमकना 
तुम्हें सवरते देखना 
अच्छा लगता है 
तुम्हे चमकते देख मैं 
भी तरोताजा महसूस करता हूँ 
तुम सवरते रहना। 

कल रात सपनों में देखा 
जैसे आसमान की परी थी 
हमने पूछा कैसे हो आप 
परी ने कहा हम तो अच्छे है 
बस आपका हाल देखने आये थे 
यु मिलाना आसान न सही 
कभी सपनों से एक मुलाकात सही 
तुम सवरते रहना। 

आँखे खुली मेरी आहट से 
देखने लगा परी को पर कुछ नहीं था 
तब समझा याद ने 
याद को यादों से मिला दिया है। 
तुम सवरते रहना। 

बिना किये कोई हलचल 
न कोई बात फिर भी 
देखो मिलन का ये मेला चला 
हम सोचते थे शयद वक़्त आने 
पर  हम से रूबरू होंगे। 
ये बात वक़्त के पार हुआ 
बिना किसी तार के बात हुआ। 
तुम सवरते रहना। 


Monday, June 30, 2014

दिल की बात कविता में …… सब के दिल में छुपा एक आग है



सब के दिल में छुपा एक आग है 
जाने कब से लोग इसे दबाये चल रहे है 
कोई इसे जानता है तो कोई अनजान है 
बात ये थोड़ी अटपटी है 
सब के दिल में छुपा एक आग है

एक रोज ज़िन्दगी में ऐसा भी आता है 
हर किसी को इसका सामना करना होता है 
यु कोई हार जाता है तो कोई जीत जाता है 
बात ये थोड़ी अटपटी है 
सब के दिल में छुपा एक आग है

वैसे इस बात को मैंने भी जानना चाहा 
बात यही पूछा एक महात्मन् से 
बात फिर यु आई समझ में 
जो इस आग को जानकर समझ लेता है 
जो काबू पाता है वही जीत पता है 
जो बेखबर है वो हार जाता है 
बात ये थोड़ी अटपटी है 
सब के दिल में छुपा एक आग है

दिल की बात कविता में ............रोशन तुम्ही से है मेरी दुनिया


रोशन तुम्ही से है मेरी दुनिया
तुम्हारे बिना सूनी है मेरी दुनिया 

यु तो बहुत से लोग है दुनिया में
सब से कहाँ मेरा वास्ता
बस तुम्ही से है मेरी दुनिया
रोशन तुम्ही से है मेरी दुनिया
तुम्हारे बिना सूनी है मेरी दुनिया 

हर रोज तुम्हारे सपनो में खो जाता हूँ
तुम्हारे साथ का एहसास है मेरे दिल में
हर पल हर लम्हा बस तुम हो मेरी दुनिया
रोशन तुम्ही से है मेरी दुनिया
तुम्हारे बिना सूनी है मेरी दुनिया 

नदी के किनारे मैं रोज जाता हूँ
इन खुदरत की वादियों में
तुम संग बीते यादों को
बस याद करते है क्योंकी
अब यादों की यादे है मेरी दुनिया
रोशन तुम्ही से है मेरी दुनिया 
तुम्हारे बिना सूनी है मेरी दुनिया

कल की बात कुछ और थी
आज की बात कुछ और है
कल तुम साथ थी
आज तुम्हारी यादें साथ है
बस इतना सा अंतर है येही मेरी दुनिया
रोशन तुम्ही से है मेरी दुनिया
तुम्हारे बिना सूनी है मेरी दुनिया

Thursday, June 26, 2014

दिल की बात कविता में .... ज़िन्दगी !

ज़िन्दगी 

ज़िन्दगी ज़िन्दगी आखिर क्या है ये ज़िन्दगी 
क्या-क्या रंग दिखाती है जिन्दगी,
अपने बिछ्डो की याद दिलाती है जिन्दगी!
रो- रो कर भी हँसना सिखाती हैं जिन्दगी,
फूलो में रहकर कांटो पर चलना सिखाती है जिन्दगी!
बेगानों को भी अपना बनाती है जिन्दगी,
दूर रहकर भी पास होने का एहसास कराती है जिन्दगी!
एक पल में हजार रंग दिखाती है जिन्दगी,
कभी पतझड़ कभी गुलशन बन ...
कभी पराए को अपना  कभी अपने को परया 
हर रंग के साथ छुपा, एक नया रंग है ज़िन्दगी !
कहने को है बहुत कुछ 
पर समझो तो सार है ज़िन्दगी 
देखने लगो इस दुनिया को पूरी उम्र कम पड़ेगी 
और चाहो तो मुट्टी में बंद कर लो ज़िन्दगी !
सागर सी गहरी है ज़िन्दगी !
और देखो इस की एक अनोखी बात 
बूँद बूँद से बना है सागर 
और हर बूँद में है एक ज़िन्दगी! .

Rj Ramesh.........


Tuesday, June 24, 2014

संगम युग की महिमा

संगम युग की महिमा 

संगम यानी 

संगम यानी - आत्मा और परमात्मा का मिलान 
संगम यानी - आत्माये डायरेक्ट परमात्मा शिव को याद करती है 
संगम यानी - शिव बाबा के द्वारा आत्मा और परमात्मा का परिचय जानना 
संगम यानी - ब्रह्मा बाबा के द्वारा शिव को देखना 
संगम यानी - देवी देवता बनना 
संगम यानी - शिव बाबा के द्वारा ज्ञान मुरली सुनना 
संगम यानी - सर्व आत्माओं के पिता परमात्मा शिव है ये जानना 
संगम यानी - शिव बाबा के द्वारा 84 जन्म की कहानी जानना 
संगम यानी - शिव बाबा के द्वारा क्राइस्ट,मुस्लिम,गौतम बुद्ध, गुरु नानक के जीवन का परिचय जानना 
संगम यानी - प्रजापिता ब्रह्मा की 84 जन्मों की जीवन कहानी जानना शिव बाबा के द्वारा 
संगम यानी - सृष्टि चक्र पांच हज़ार साल का है ना की लाखो वर्ष का 
संगम यानी - सुख शांति मिलती है पवित्र धारण करने से 
संगम यानी - राजाई प्राप्त करना योग बल से ना की बाहुबल से 
संगम यानी - परमात्मा शिव गीता ज्ञान यज्ञ की स्थापना करते है 
संगम यानी - सृष्टि के आदि -मध्य-अंत को जानना 
संगम यानी - नर से नारायण बनना, नारी से लक्ष्मी बनना 
संगम यानी - परमात्मा शिव के द्वारा मनुष्य से ब्राह्मण और ब्राह्मण से फरिश्ता और फरिश्ता से देवता बनना 
संगम यानी - हम सभी आत्माये आपस में भाई-भाई है यह परमत्मा शिव के द्वारा जानना 
संगम यानी - परमपिता परमात्मा का साकार मनुष्य लोक में अवतरण  



  

Sunday, May 25, 2014

दिल की बात कविता में.… .... प्रेम

प्रेम 

बहुतों ने प्रेम की परिभाषा लिखि है 
प्रेम क्या है कैसा है प्रेम किसे कहते है 
किसीने ऐसा भी कहा है 
प्रेम नादान है 
प्रेम में किसी का भान नहीं होता 
न उम्र का न लोक - लाज का 
प्रेम में कोई बन्धन नहीं 

प्रेम ही जीवन है 
प्रेम के आगे सब कुछ फीका है 
प्रेम सब के जीवन में आता है 
कभी दुःख में तो कभी सुख में 

व्यक्ति का किसी न किसी से प्रेम होता है 
ना कहने पर खुद से तो प्रेम होता ही है 
जब अपना मन किसी के लिए विचार करे 
तो समझ लेना वाही प्रेम है 

कभी माँ - बाप तो कभी भाई - बहन 
सब का हम से प्रेम होता है 
कितने ही दूर हम उन्हें रखे 
उनके प्रेम के सामने बाकी सब छोटा लगता है 

प्रेम का संबंध भावना से है 
भावना से ही मन का तार जुड़ता है 
इसी कारण बिना जाने पहचानें भी 
प्रेम हो जाता है 

सच्चा प्रेम सब बंधनों से मुक्त होता है 
देह और देह के बंधनो से भी परे 
जहाँ अन्तर आत्मा और परमात्मा का 
मिलान होता है 
ये भी भावनाओं के तार से ज्ञान के मंथन से 
प्राप्त होता है 
आत्मा समझ परमात्मा से मिलान 
मानना ही सच्चा प्रेम है 



Friday, May 23, 2014

दिल की बात कविता में ....

मन में सुमन खिलते है 
जब ज्ञान की रंग में रंगते 
आपके ज्ञान की हर बिंदु में  
समाया है अनोखा रहस्या
जितना करू मैं  चिंतन
उतना मन में उठे लहरे आनंद के 

मन कभी कभी गुम  रहता है 
तेरी ही यादो में 
तेरी ही बातो में 
लगता है जैसे ये 
सब कल की ही बाते हो

देखता हूँ हर पल तुम्हे 
अपने साथ कभी चिंतन में 
तो कभी नुमा शाम की वेला में  
तो कभी  अमृतवेला में 

मन को अतीन्द्रिय सुख मिलता है 
गध गध  हो जाता हूँ
ये सोच सोच कर 
क्यू इतनी देरी से आपसे मिला 
चलो अब जो हू सो हुआ
दिल कहता है बस
एक बाबा एक मुरली एक मधुबन
और नही कुछ है मुझे भाए...

रमेश .... 

Thursday, May 22, 2014

दिल की बात कविता में - आसान है किसी को अपना बनाना



आसान है किसी को अपना बनाना 
पर प्रेम करना थोड़ा मुश्कील है 

जैसे गुलाब कितना सुन्दर क्यों न हो 
पर काटो में ही रहकर जीना मुश्कील तो है 

लगता सब को प्यारा गुलाब ही है 
पर उसका जीवन तो काटो में है 

ऐसा ही कुछ रिस्ता मेरा और आपका है 
कभी कट्टा तो कभी मीठा 
कभी बहुत मीठा 
कभी रूठना कभी खिलकर हँसना 
कभी टूटना तो कभी जोड़ना 
एक बात है  दोनों में 
इन सब के बाद भी 
हम मिलते है और मिलते रहते है 

आसान है किसी को अपना बनाना
पर प्रेम करना थोड़ा मुश्कील 
जैसे गुलाब कितना सुन्दर क्यों न हो 
पर जीवन बिताना है काटो में