Tuesday, July 8, 2014

दिल की बात कविता में। … …… चाँद को निकलते देखा !



कड़ी धूप और ढलती श्याम 
के बाद हमने आसमान में 
चाँद को निकलते देखा ! 

हर सोलह में रूप बदलते देखा 
कभी हल्का सा रेशम की डोर 
तो कभी एक गेंद की तरह 
हमने चाँद को निकलते देखा !

यु आसान नहीं कुछ पाने को 
यु मुश्किल भी नहीं कुछ पाने को 
ज़िन्दगी वक्त के साथ चलती है 
रंग बदल बदल कर जैसे 
हमने चाँद को निकलते देखा !

यु चाँद भी एक सा नहीं रहता 
कभी बढ़ते हुवे तो कभी घटते हुवे 
वक्त के साथ रंग बदलते हुवे 
कभी बादलों में छुपते हुवे 
हमने चाँद को निकलते देखा !

बस समझ लो जीवन के सार को 
सुख और दुःख में अपने रंग न बदले 
ये तो आने और जाने है 
वक्त के साथ जैसे बदलता है चाँद 
हमने चाँद को निकलते देखा !


Rj Ramesh

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