कड़ी धूप और ढलती श्याम
के बाद हमने आसमान में
चाँद को निकलते देखा !
हर सोलह में रूप बदलते देखा
कभी हल्का सा रेशम की डोर
तो कभी एक गेंद की तरह
हमने चाँद को निकलते देखा !
यु आसान नहीं कुछ पाने को
यु मुश्किल भी नहीं कुछ पाने को
ज़िन्दगी वक्त के साथ चलती है
रंग बदल बदल कर जैसे
हमने चाँद को निकलते देखा !
यु चाँद भी एक सा नहीं रहता
कभी बढ़ते हुवे तो कभी घटते हुवे
वक्त के साथ रंग बदलते हुवे
कभी बादलों में छुपते हुवे
हमने चाँद को निकलते देखा !
बस समझ लो जीवन के सार को
सुख और दुःख में अपने रंग न बदले
ये तो आने और जाने है
वक्त के साथ जैसे बदलता है चाँद
हमने चाँद को निकलते देखा !
Rj Ramesh
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