Wednesday, September 24, 2014

दिल की बात कविता में ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,आपकी राहा में हम

आपकी राहा में हम। … 


आपको की राहा में चलना 
यु आसान नहीं था 
पर तुम्हे चलते देखकर चलते रहे हम 

रास्ते देख कर कभी सोचा न था
कि हमें इस रास्ते जाना है 
पर तुम्हे जाते देखकर आगे बढ़ते रहे हम 

ऊँची मंजिल की कभी कल्पना ना थी 
यु उड़ान भरना ख़यालो न था 
पर आपको उड़ते देख, उड़ान भर रहे है हम 

अब लगता है जैसे साथ तो है हम 
पर मेरे और आपके चलने में 
कुछ अहसास और समय का विलंब था 
इस लिये कभी आप आगे,  तो पीछे रह जाते हम

इन्तज़ार उस घडी की आप को भी है 
और हमको भी जहाँ हम दोनों के कदम साथ चले 
मंजिल आये न आये 
पर ख़ुशी इस बात की होगी 
अकेले नहीं अब, साथ साथ है हम 

रमेश 


Tuesday, September 16, 2014

दिल की बात कविता में.................मुस्कुराते रहो

मुस्कुराते रहो  

हर उदासी से नज़रे चुराते रहो 
मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो

इस ग़ज़ल को सदा गुनगुनाते रहो 
मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो

मुस्कराहट का जादू चढ़े जिस के सर 
उसको लगाती सरल ज़िन्दगी की डगर 
उम्र भर इसका जादू जगाते रहो 
मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो

दर्द कोई हो ,हो जाये पल में हवा 
मुस्कराहट है ऐसी प्रभावी दवा 
दर्द को यूँ अँगूठा दिखाते रहो 
मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो

मुस्कराहट ही बस ऐसी मेहमान है 
जिसकी हर दिल की महफिल से पहचान है 
इस से महफिल दिलो की सजाते रहो 
मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो

सब से बेहतर है भाषा ये संसार की 
खुशबू आती है इस से सहज प्यार की 
खुशबू ए इसकी जी भर लुटाते रहो 
मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो

कई चेहरे हो जाते है इस से निखर 
मुश्किलें चाहे जैसे हो जाये बिखर 
चाहे यूँ ही सही बस निभाते रहो 
मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो

सुशील सरित - आगरा 

आपका स्वर है, आपकी है आवाज़.

आपका स्वर है, आपकी है आवाज़, रेडियो मधुबन
करे सुरीला हर पल जो वो साज है, रेडियो मधुबन।
संग इसके खिलो गुनगुनाते रहो
इसको सुनते रहो मुस्कुराते रहो।

सुभ्रपात संग नयी किरण की नयी रौशनी प्यारी
जियो ज़िन्दग़ी भर उड़ान संगीत की दुनिया न्यारी
मेरा गॉव, मेरा अंचल सजाते रहो
इसको सुनते रहो मुस्कुराते रहो।

रिदम ऑफ़ लाइफ का सुनहरा ताज,
रेडियो मधुबन करे सुरीला हर पल जो वो साज
अपनी बोली अपनी भाषा, ख़ुशी के नगमे गाये.
दुनिया एक अनेक आवाज़े, समय की माँग सुनाये
धरती धोरा री रंगत खिलाते रहो
इसको सुनते रहो मुस्कुराते रहो।

कैरियर ऑप्शन का भी खोलता राज
रेडियो मधुबन करे सुरीला हर पल जो वो साज
खूब तराने नये पुराने, युथ जंक्शन झिलमिल
वन्दे मातरम गाये आओ हम सब रहे हिलमिल
स्वास्थ अपना भी सुनकर बनाते रहो
इसको सुनते रहो मुस्कुराते रहो।

परमात्मा चिन्तन का अन्दाज़
रेडियो मधुबन करे सुरीला हर पल जो वो साज

आपका स्वर है, आपकी है आवाज़, रेडियो मधुबन
करे सुरीला हर पल जो वो साज है, रेडियो मधुबन।
संग इसके खिलो गुनगुनाते रहो
इसको सुनते रहो मुस्कुराते रहो।

सुशील सरित - आगरा

Tuesday, September 9, 2014

B.K.Commentaries................................Self Motivation.

मैं मास्टर गणपति हूँ। …

ओम शान्ति

गण का अर्थ है पवित्र और पति का अर्थ है स्वामी !..... पवित्रता में ही सब कुछ समाया हुआ है पवित्रता ही नवीनता है। स्वामी बनना है  तो पवित्रता को धारण करना होगा और पवित्रता को धारण करना है तो गहन शान्ति में खो जाना होग अपने नीज़ स्वरूप में। …

तो चलिए अपने घर शांतिधाम में जहाँ से हमें शान्ति की प्राप्ति होगी। शांतिधाम ही हम आत्माओं का असली घर है। वही से मेरा आना और फिर जाना है। और वही अगम निगम का धाम है।

मैं अपने मन को कुछ समय लिए संसार की बातों अलग करते हुवे

शान्ति की अनुभूति के लिए मन और बुद्धि से शान्तिधाम की ओर उड़ान भर रहा हूँ। …

सूर्य, चाँद, सितारोँ से पार परमधाम की और जा रही हूँ। …

जैसे जैसे ऊपर जा रही हूँ।  जीतना ऊपर जा रही हूँ उतना ही ये संसार छोटा होता जा रहा है

अब मैं आत्मा बहुत ऊपर आ  गयी हूँ। … ये संसार ये धरती एक गेंद की तरह दिखाई दे रहा है। ....

अब मैं आत्मा और ऊपर परमधाम में पहुँच गयी हूँ। .... धरती , देह और देह के सम्बन्ध सब भूल गए है। …

अब मुझे चारो ओर प्रकाश ही प्रकाश दिखाई रहा है। … लाल सुनेहरा प्रकाश। ....

बहुत शान्ति है।  न कोई आवाज़ है  न कोई हलचल जैसे सब कुछ शान्त है। … सुन्न अवस्था है

डेड साइलेंस है। .... मेरी आत्मा शान्ति से भरपूर हो  रही है। … इस दिव्या  परलोक में  एक बहुत ही सुन्दर

लाल प्रकाशमय  ज्योति है। … उस ज्योति से शान्ति की किरणे निकल निकल कर मुझ आत्मा में

प्रवेश कर रही है। ……  ये अनोखा अलौकिक मिलन मुझ आत्मा की जन्म जन्मांतर की थकान दूर

कर रही है।................. मैं आत्मा कही जन्मो के पाप व बोझ से मुक्त हो रही है। ..........

मैं आत्मा इस अनुभव को आपने साथ सदा बनाये रखूँगा। … वो मिठे परमात्मा मेरे प्यारे बाबा

आपका दिल से शुक्रिया....  शुक्रिया ....... शुक्रिया !!!

मैं आत्मा एक नयी चेतना और एक नयी शक्ति के साथ बाबा ( परमात्मा ) का शुक्रिया करते हुवे

वापस अपने कर्म भूमि पर अवतरित हो रही हूँ। ……………

परमधाम से नीचे , सितारोँ से नीचे। … धीरे धीरे चाँद से नीचे और सूर्य से नीचे उतर रही हूँ। …

मैं आत्मा आपने कर्म भूमि की ओर आ रही हूँ अब मुझे धरती एक गेंद की तरह दिखाई देने लगा है

मैं जैसे जैसे नीचे आ रही हूँ उतना ये धरती बडा बड़ा बनता जा रहा है। …

अब में आत्मा अपने शरीर में भृकुटि के मध्य में अपने सिंहासन पर विराजमान हो गयी हूँ

मैं हर कर्म साक्षी होकर दिव्य गुणों से युक्त होकर पवित्र मनसा से करुँगी। …

ओम शांति ओम शांति ओम शांति





Monday, September 8, 2014

दिल की बात कविता में ...........वो माया आपने धमाल कर दिया।

वो माया आपने धमाल कर दिया। 

हमारा सारा जीवन आपने दुःख हाल कर दिया 
हम तो सुल्जन में उलझाया आकर आपने 
वो माया आपने धमाल कर दिया। 

हम तो थे जगे हुवे आकर सुला दिया आपने 
तेरी कड़वी दृष्टी ने हमको कंगाल कर दिया 
वो माया आपने धमाल कर दिया। 

हम तो थे उजाले में किया अँधेरा आपने 
आकाश के पुंछी को दिया पिंजरा आपने 
आपकी अशुभ आशिष ने हमको परेशान कर दिया 
वो माया आपने धमाल कर दिया। 

हमारा आधा कल्प बिगाड़ा माया तेरी याद ने 
हमें बिलकुल ही दुःखी बनाया माया तेरे पांच विकार ने 
आपकी अज्ञानता ने हमें खुदा और खुद से दूर कर दिया 
वो माया आपने धमाल कर दिया। 



Tuesday, September 2, 2014

B.K.Commentaries................. High Spiritual Thoughts.

ओम शान्ति 

मैं मास्टर प्रथम पूजनीय आत्मा हूँ। 

हम सब ये जानते  है कि किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले श्री गणेश जी की पूजा होती है। गणेश जी को दिव्या बुद्धि प्राप्त थी। वह हर कार्य बहुत ही सुन्दर और विधि पूर्वक करते थे। उनके जीवन का एक प्रसंग बहुत ही प्रसिद्ध है। जब कार्तिक और गणेश जी को विश्व भ्रमण की बात कही गयी तो गणेश जी ने बुद्धि से काम लिया और वो अपने माता पिता को बीच में बिठाकर उनका चक्र लगया। और कहा मेरे लिए तो आप ही मेरी दुनिया है आप के बिना मैं कहा विश्व में आता। इसलिए गणेश जी को बुद्धि का देवता कहा जाता है। 

गणेश जी के जीवन की हर बात हमें साद गुणों से जोड़ता है साद मार्ग पर चलने के लिए प्रेरणा देता है। 
और उनका एक गयन भी है भक्ति में गाते है।' गणपति आयो बाबा रिद्धि -सिद्धि लायो ' इस का सही अर्थ ये है कि विधि से सिद्धि प्राप्त होता है। …………… 

वर्तमान समय सब मनुष्य आत्माओं में पांच विकार है। जिस के कारण मनुष्य दुःखी है। जब सब मनुष्य दुःखी हो तो दुःख से कैसे छूटे कौन छुड़ायेगा ? ये सवाल उठेगा। इस का विधि येही है। सभी आत्माओं के पिता परमात्मा ही एक ऐसा है। जो सदा पावन है। सुख -दुःख से न्यारा है। वाही दुःख हरता सुख करता है। उसी की याद से उन्हीं से बुद्धि का कनेक्शन जोड़ने से हम आत्मा दुःख से मुक्त हो सकते है। वही दिव्या बुद्धि के दाता है। 

जिनसे आज से पांच हज़ार साल पहले गणेश जी ने भी दिव्या बुद्धि पायी थी।  उन्हें विधि पूर्वक याद कर। 

तो क्यों न हम भी आज इसी विधि को अपना कर सिद्धि प्राप्त कर ले। ………… 

तो चले ………  आज हम और आप फिर से अपने को आत्मा समझ उस परमात्मा को याद करेंगे। …………

अपन को संसार की बातों से अलग कर स्वम् को आत्मा निश्चय कर। ………मन और बुद्धि के संकल्प द्वारा परमधाम की ओर उड़ान भरें। …

मैं आत्मा इस आवाज़ की दुनियाँ से दूर सूरज, चाँद , सितारों से पार पहुँच गयी हूँ। … जहाँ बहुत शान्ति है चारों ओर प्रकाश ही प्रकाश है। इस प्रकाशमय अलोक में प्यारे बापदादा मेरा स्वागत कर रहे है। मैं आत्मा बापदादा की गोद में पहुँच गयी हूँ। बापदादा का स्नेह मुझ आत्मा को तृप्त कर दिया है। मैं आत्मा अतीन्द्रिय सुख में खो गयी हूँ। ................... 

बापदादा के साथ मैं आत्मा एक ओर उड़ान भरते हुवे परमधाम में पहुंच गयी हूँ जहाँ न आवाज़ है न संकल्प बस  डेड साइलेंस है। ……………… मेरी आत्मा परमधाम में परमात्मा के मिलन में डूब गयी है। 

बिन्दु रूप अवस्था में खो गयी है। बीज रूप में ठीक गयी है। ...................... 

परम शान्ति में खो गयी है। ............. शान्ति , शान्ति और शान्ति।      ( कुछ देर इसी अवस्था में रहे )

अब मुझ आत्मा को सच्ची शान्ति का एहसास हो चूका है। शान्ति में ही सब कुछ है। शान्ति ही शक्ति का आधार है।  शान्ति नहीं तो कुछ भी नहीं , शान्ति से ही हर कार्य की सुरवात होती है। शान्ति ही शुभ है शान्ति ही विधि है शान्ति से सिद्धि मिलती है। इस लिए कहा है, ओम में सब कुछ है। याने ओम माना आत्मा और आत्मा का स्वधर्म है शान्ति इसलिए स्वधर्म में सुख है। 

मैं आत्मा अब धीरे धीरे परमधाम से निकल कर अपने शरीर में भृकुटि में पहुँच गयी हूँ। में संकल्प करती हूँ 

मैं हर कार्य शान्ति में रहकर करुँगी ………अपने स्वधर्म को याद करते हुवे कर्म करुँगी। …

    …ओम शान्ति शान्ति  शान्ति 


Monday, September 1, 2014

B.k. Commentaries.....................Self Motivations.

मैं मास्टर गणेश हूँ। …

 ओम शांति 

वैसे देखा जाय तो गणेश जी महीमा बहुत है उनके स्वरूप एक अलंकारी स्वरुप है उनके चहरे की अकृति गजमुख की है और पेट को लंबोदर कहते है और इन सब के बाद भी उनका वाहन एक चूहा है। …

इन सब बातों को देखने के बाद जरूर चिन्तन चेलगा और ये एक सुन्दर अध्यात्मिक चिन्तन का विषय है। 

. तो चलो कुछ देर के लिए हम इस आध्यात्मिक चिंतन में खो जाते है। … Music …। 

गणेशजी याने एक गुणवान व्यक्तिव की छवी का प्रतिक है हर अंग एक विशेष गुण और शक्ति का प्रतिक है। 
आज उनके पेट याने जिसे लंबोदर कहते है। ये समाने की शक्ति का प्रतिक है। 

गणेश जी को कोई भी बात बताने से वह बात उनके अन्दर समा जाता वो किसी और को कभी नहीं बताते। 

इस लिए उनके इस गुण के कारण उन्हें लंबोदर के नाम से याद भक्ति मार्ग में आज भी किया जाता है। 

और आज से पांच हज़ार साल पहले गणेश जी ने ये गुण और शक्ति परमात्मा से पाया था। 

तो क्यों न आज में भी और आप भी इस शक्ति को परमात्मा से पा ले  ................... 

तो चलो। ………… अपने मन और बुद्धि के विमान द्वारा इस पांच तत्वों से पार परमधाम की ओर 

आकाश से परे नीले बादलों के पार। ………………… 

शुक्ष्म लोक मैं जहाँ प्यारे बाबा हमारा इंतज़ार कर रहे है। ……………… 

मैं आत्मा इस संसार में अलग अलग नाम रूप से पाठ बजा कर वर्तामन में इस रूप में हूँ।  अब मुझे इस बात 

का ज्ञान हो गया है। में आत्मा परमधाम से आकर यहाँ पर पाठ बजाया है।  अब फिर से परमधाम जाकर 

शक्ति प्राप्त कर देव स्वरूप बनना है।  और फिर पाठ बजाना है।  मेरा ही गायन और पूजन अब तक चल रहा 

है।  मुझे सब कुछ याद आ गया है।  ……… प्यारे बाबा आपका  सुक्रिया मिठे बाबा आपका सुक्रिया। …

मैं आत्मा इस आवाज़ की दुनिया से दूर नीले आकाश की ओर मन और बुद्धि से उड़ान करते हुवे। …

बहुत ही ऊपर पांच तत्वों से पार शुक्ष्म लोक में पहुँच गयी हूँ। 

यहाँ चारो और शांति ही शांति है।  प्यारे बापदादा मेरा बाहें पसारे मेरा स्वागत कर रहे है।  ऐसा लग रहा है जैसे 

बापदादा बस सिर्फ और सिर्फ मेरा ही इंतज़ार में खड़े है मैं उनसे मिलकर अलौकिक आनन्द में खो गया हूँ 

मेरे अंदर कोई शब्द नहीं है।  इस रूहानी प्रेम का , इस रूहानी प्यार का किन शब्दों में वर्णन करू। ................... 

बस दिल  कहता है बाबा तुम्हें देखता राहु। ................( गीत की कुछ लाइन सुना सकते है )

अब बापदादा मुझे कहा रहे है , - " आओ मेरे प्यारे बच्चे आओ तुम्हीं मेरे गणेश स्वरूप बच्चे हो तुम्हीं ज्ञान स्वरूप मेरे बच्चे हो तुम्ही मेरे मास्टर शक्तिवान बच्चे हो। … आओ आओ आपका स्वागत है " कहते हुवे बाबा मुझे अपने साथ लेकर चलने लगे और ऊपर की तरफ। ……… और जैसे ही मेरा हाथ बाबा ने पकड़ा मैं अशरीरी बन गया 
मैं बिन्दु स्वरुप में समां गया। मैं एक लाइट और माइट में खो गया। 

कुछ देर इस आवस्था में डूबे रहे………………… 

में आत्मा भरपूर बन गया हूँ शक्ति से भरपूर बहुत हल्का महसूस कर रही हूँ।   शान्ति की शक्ति से भरपूर। ................... 

मुझे  याद आ गया। .… हाँ हाँ में ही मास्टर गणेश हूँ।  मेरा ही गायन पूजन वर्तामन में हो रहा है।  ये शक्ति 

और ऐसा गुणवान  बनाने वाले कोई और नहीं वो मेरे अलौकिक पिता परमात्मा शिव बाबा है। 

शिव बाबा आपका दिल से धन्यवाद , सुक्रिया बाबा मैं अपने इस पवित्र स्वरूप में रहकर श्रेष्ठ कर्म करुँगी 

सुक्रिया बाबा सुक्रिया बाबा 

ओम शांति ओम शांति ओम शान्ति. …………