Saturday, July 19, 2014

दिल की बात कविता में। …………… .....................आँखे


ये आँखे बोलती है। 
कहती है दिल की बात 
किसी की आँखों ने दी 
एक नयी ज़िन्दगी मुझे
तो किसी की आँखों ने 
छीन ली ज़िन्दगी मुझ से 
ये आँखे बोलती है। 


किसी की आँखों में गम 
किसी की आँखों में ख़ुशी 
किसी की आँखों में सपनें 
ये आँखे बोलती है। 

किसी की आँखों में यादें 
किसी की आँखों में उमीदे 
किसी की आँखों में अरमान 
ये आँखे बोलती है.

उनकी आँखों में देख आँसू 
दिल मेरा भी पिगल गया 
सहस, हिम्मत, आक्रोश 
मेरे भी दिल में जगे थे 
पर उनके आँसू नहीं पोच सके 
ये आँखे बोलती है। 

इन आँखों से है ये दुनिया 
आँखे नहीं तो दुनिया नहीं 
फिर भी कौन करता 
कदर इन आँखों की 
जिन आँखों में सदा 
बहता था निश्छल निर्मल प्यार 
आज उन्हीं आँखों में है 
मोह, माया, स्वार्थ और फरेब 
ये आँखे बोलती है। 


समुन्दर में जो तूपान आते 
वो कुछ समय के बाद रुख जाते 
पर इन आँखों में जब आंसू बहते है   
तो ये भी कोई समुन्दर से कम नहीं 
और इस तूफान को 
शयद ही कोई रोक पाये 
ये आँखे बोलती है। 

ये दोस्त आओ मिलकर 
करे बस एक ही फरियाद 
ये खुदा कर दे मेहर इतनी  
जिन्हे दी है आँखे 
उन्हें कभी आँसू न दे 
बस एक येही है आरजू 
ये आँखे बोलती है। 


Thursday, July 17, 2014

दिल की बात कविता में। ……............. अब रोज कुछ बदलना है।





कुछ बाते नयी कुछ विचार नये 
सुन कर लगा  
कुछ बदलाव करेंगे जरुरु 
अब रोज कुछ बदलना है। 

पत्नी मेरी मुझ से आगे 
निकल गयी इस कार्य में। 
वो रोज ज़ेवर बदलती 
और कभी तेवर बदलती।  
अब रोज कुछ बदलना है। 

देश में भी इस बीच 
काफी बदलाव देखे हमने 
कभी दंगे, कफ्र्यू ,हड़तालें 
तो कभी रिक्शा, टैक्सी, रेल बंद। 
अब रोज कुछ बदलना है। 

हमने बहुत कोशिश की 
बदलने की पर 
अपने अन्दर देख कर 
सोच चला अंतर मन में बदलाव नहीं
तो बाहर के बदलाव से कुछ नहीं 

कुछ बाते नयी कुछ विचार नये 
सुन कर लगा  
कुछ बदलाव करेंगे जरुरु 
अब रोज कुछ बदलना है। 

Saturday, July 12, 2014

दिल की बात कविता में। …… उसने आवाज़ दिया मुझ को



उसने आवाज़ मुझ को दिया  
वो आवाज़ जो मेरे जीवन में साज़ भर दिया 

अपने तो सुल्जे प्रश्नों में ही उल्जा दिया 
उसने बिना पूछे ही मेरी हर बात सुलजा दिया 

रस्ते में मेरे जाने कितने अँधेरे थे 
उसने मेरी आँखों में एक नयी रोशनी भर दिया 

मैं तो दिन के उजाले में भी डर जाता 
उसने अँधेरे में भी अकेला चलना सीखा दिया 

अजब सी बात थी उस में 
लाख कोशिश के बाद भी 
वो कही अदृश्य है आज भी। .... 

उसने आवाज़ मुझ को दिया  
वो आवाज़ जो मेरे जीवन में साज़ भर दिया 


Happy Guru Poornima 
Rj Ramesh

Tuesday, July 8, 2014

दिल बात कविता में .......... उसकी साहस और विश्वास में ताकत है।

  उसकी साहस और विश्वास में ताकत है। 

 आदमी मेहनत करना जानता  है। 
 धरती माँ की गोद से सोना निकालना जानता है। 
 उसकी साहस और विश्वास में ताकत है। 

वो आसमान के रंग देख कर 
बदलाव करता है रुक मौसम का जानता है 
उसकी साहस और विश्वास में ताकत है। 

वो अब चिट्टी क्यों लिखे परदेश से 
दिन-रात जब उनका ही ख़याल रखता है। 
हर पल यादों का दीपक दिल में जलता है। 
उसकी साहस और विश्वास में ताकत है। 

वो जानता है आज जो दुरी है। 
कल मंगल मिलन का ये निशान है।  
आज वीरान है कल खलियान है। 
आज दुःख कल सुख ये जानता है।
उसकी साहस और विश्वास में ताकत है।


Rj Ramesh

दिल की बात कविता में। … …… चाँद को निकलते देखा !



कड़ी धूप और ढलती श्याम 
के बाद हमने आसमान में 
चाँद को निकलते देखा ! 

हर सोलह में रूप बदलते देखा 
कभी हल्का सा रेशम की डोर 
तो कभी एक गेंद की तरह 
हमने चाँद को निकलते देखा !

यु आसान नहीं कुछ पाने को 
यु मुश्किल भी नहीं कुछ पाने को 
ज़िन्दगी वक्त के साथ चलती है 
रंग बदल बदल कर जैसे 
हमने चाँद को निकलते देखा !

यु चाँद भी एक सा नहीं रहता 
कभी बढ़ते हुवे तो कभी घटते हुवे 
वक्त के साथ रंग बदलते हुवे 
कभी बादलों में छुपते हुवे 
हमने चाँद को निकलते देखा !

बस समझ लो जीवन के सार को 
सुख और दुःख में अपने रंग न बदले 
ये तो आने और जाने है 
वक्त के साथ जैसे बदलता है चाँद 
हमने चाँद को निकलते देखा !


Rj Ramesh

दिल की बात कविता में। …अन्तर मन में देख ज़रा



जब जब तेरी बाते सुनता हूँ 
मेरा अन्तर मन शुद्ध हो जाता है 
दिल बिना सोचे ही कहता है 
अन्तर मन  में देख ज़रा

सांसों की इस माला में 
जब तेरी याद बस जाती है 
हर सांसों साँस को सुकून मिलता है 
दिल कहता है अब  
अन्तर मन  में देख ज़रा

कही जन्मो से भटकता रहा 
जब मिला तुझ से 
सारी थकान मिट गयी पल में 
और हो गया दर्शन चारों धाम के 
दिल कहता है अब 
अन्तर मन  में देख ज़रा

रावण वाली लंका को ढूंढ़ता था 
अब मैं ने जाना वो बाहर नहीं 
वो तो मेरे अंदर छुपा है 
अब न कोई गम किसी बात का 
हर बात की सलाह है तू 
तुझे पाकर मैंने पाये तीनों लोक 
दिल कहता है अब 
अन्तर मन  में देख ज़रा  

मन ही माया मन ही पूजा 
मन का ही खेल सब रे 
मन को करो अब प्रभु अर्पण 
हो जाओ मन जीत 
बनो अब जगत जीत 
दिल कहता है अब 
अन्तर मन  में देख ज़रा

Rj Ramesh

Monday, July 7, 2014

दिल की बात कविता में …… आँखों ने देखा है



आज वासुदेव कुटुंब की बात होती है 
पर आँखों ने देखा है यहाँ 
परिवारों को बिखरते हूवे 

दोस्ती की दास्तान सुनाये जाते है 
पर आँखों ने देखा है यहाँ 
एक दोस्त ही दोस्त का 
जानी दुश्मन बनते हूवे 

लैला मजनू  हीर रांझा की 
प्रेम कहानी सब सुनाते है 
पर आँखों ने देखा है 
जो अपने को प्रेमी कहते थे 
वही समय साथ चलते 
अब अपना घर बसा बैठे है 

वीर जवानों की अक्सर अमर 
गाथा स्कूलों में हम सुनते आये है 
पर आँखों ने देखा है 
वीर की वर्दी पहन कर भी 
देश में देश के लोगों को 
बन्दुक बेचते हूवे 

सुना है एक संत को 
आत्मा सम्मान पे बात करते हुवे 
और आँखों ने देखा है 
उसी संत को आत्मा ग्लानि में 

Rj Ramesh.....

Sunday, July 6, 2014

दिल की बात कविता में। .... हैलो क्या बात है !



हैलो क्या बात है ?
किस बात से काफा हो 
अपने ही कारोबार में 
उलजे हो या कोई और बात 
कुछ तो कहो मेरे यार 
हैलो क्या बात है ?

आज याद की डोरी से 
तुम्हे याद से बंधाने की 
कोशिश की 
शायद इस का अहसास 
होगी तुम्हे भी 
कुछ तो कहो मेरे यार 
हैलो क्या बात है ?

चलो मेरे दोस्त 
जैसे भी जहाँ भी हो आप 
आपको मिले सफलताएं हज़ार  
जीत हरदम आपकी ही हो 
येही दुवा करते हम हर बार 
कुछ तो कहो मेरे यार 
हेलो हेलो ओके ओके 
आप नहीं बोल रहे है 
कोई बात नहीं लेकिन 
ये मेरी है आखिरी बात 
खुश रहिये और
ख़ुशी बाँटिये और 
यही ख़ुशी आपकी 
ख़ुशी बढ़ाएगी !!!

Saturday, July 5, 2014

दिल की बात कविता में... … मैं अंजाना !

दिल की बात कविता में... … मैं अंजाना !

कुदरत की खुदाइ 
दिलों की दूहाइ !
जब होता है 
सब के अन्दर 
सब के लिये 
निस्वार्थ प्यार 
तब बरसे बीन 
बदल ये बरसात 
कुदरत की खुदाइ 
दिलों की दूहाइ !

इला इलाही का 
देखो ये आलम 
कैसे उसने भी 
सजाया इस 
दुनिया का रूप 
जो रहता नहीं 
इस दुनिया में 
और जिसे रहने 
दिया इस दुनिया में 
वो कुछ भी नही 
जाने इस दुनिया 
के बारे में..... 
कैसे होती है 
कुदरत की खुदाइ 
दिलों की दूहाइ !

पर अनोखा है 
ये खेल उसका 
हर चीज का है 
एक ही गुण 
सब को इस 
चक्र में है फिरना 
चाहे राजा हो 
या रंक 
ये चक्र कभी न 
रुकता और 
सब को मिलता 
सुनेहरा मौका 
यहाँ  पर आने 
और जाने का 
पर बहुत कम 
ही इस चक्र को 
जाने इस का आदि 
और अंत क्या है 
कैसे होती है 
कुदरत की खुदाइ 
दिलों की दूहाइ !






Friday, July 4, 2014

दिल की बात कविता में…………तुम सवरते रहना।

तुम सवरते रहना।  


श्याम की तरह तुम सवारना 
सुबह की तरह तुम चमकना 
तुम्हें सवरते देखना 
अच्छा लगता है 
तुम्हे चमकते देख मैं 
भी तरोताजा महसूस करता हूँ 
तुम सवरते रहना। 

कल रात सपनों में देखा 
जैसे आसमान की परी थी 
हमने पूछा कैसे हो आप 
परी ने कहा हम तो अच्छे है 
बस आपका हाल देखने आये थे 
यु मिलाना आसान न सही 
कभी सपनों से एक मुलाकात सही 
तुम सवरते रहना। 

आँखे खुली मेरी आहट से 
देखने लगा परी को पर कुछ नहीं था 
तब समझा याद ने 
याद को यादों से मिला दिया है। 
तुम सवरते रहना। 

बिना किये कोई हलचल 
न कोई बात फिर भी 
देखो मिलन का ये मेला चला 
हम सोचते थे शयद वक़्त आने 
पर  हम से रूबरू होंगे। 
ये बात वक़्त के पार हुआ 
बिना किसी तार के बात हुआ। 
तुम सवरते रहना।