Tuesday, June 24, 2014

संगम युग की महिमा

संगम युग की महिमा 

संगम यानी 

संगम यानी - आत्मा और परमात्मा का मिलान 
संगम यानी - आत्माये डायरेक्ट परमात्मा शिव को याद करती है 
संगम यानी - शिव बाबा के द्वारा आत्मा और परमात्मा का परिचय जानना 
संगम यानी - ब्रह्मा बाबा के द्वारा शिव को देखना 
संगम यानी - देवी देवता बनना 
संगम यानी - शिव बाबा के द्वारा ज्ञान मुरली सुनना 
संगम यानी - सर्व आत्माओं के पिता परमात्मा शिव है ये जानना 
संगम यानी - शिव बाबा के द्वारा 84 जन्म की कहानी जानना 
संगम यानी - शिव बाबा के द्वारा क्राइस्ट,मुस्लिम,गौतम बुद्ध, गुरु नानक के जीवन का परिचय जानना 
संगम यानी - प्रजापिता ब्रह्मा की 84 जन्मों की जीवन कहानी जानना शिव बाबा के द्वारा 
संगम यानी - सृष्टि चक्र पांच हज़ार साल का है ना की लाखो वर्ष का 
संगम यानी - सुख शांति मिलती है पवित्र धारण करने से 
संगम यानी - राजाई प्राप्त करना योग बल से ना की बाहुबल से 
संगम यानी - परमात्मा शिव गीता ज्ञान यज्ञ की स्थापना करते है 
संगम यानी - सृष्टि के आदि -मध्य-अंत को जानना 
संगम यानी - नर से नारायण बनना, नारी से लक्ष्मी बनना 
संगम यानी - परमात्मा शिव के द्वारा मनुष्य से ब्राह्मण और ब्राह्मण से फरिश्ता और फरिश्ता से देवता बनना 
संगम यानी - हम सभी आत्माये आपस में भाई-भाई है यह परमत्मा शिव के द्वारा जानना 
संगम यानी - परमपिता परमात्मा का साकार मनुष्य लोक में अवतरण  



  

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