Tuesday, September 16, 2014

दिल की बात कविता में.................मुस्कुराते रहो

मुस्कुराते रहो  

हर उदासी से नज़रे चुराते रहो 
मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो

इस ग़ज़ल को सदा गुनगुनाते रहो 
मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो

मुस्कराहट का जादू चढ़े जिस के सर 
उसको लगाती सरल ज़िन्दगी की डगर 
उम्र भर इसका जादू जगाते रहो 
मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो

दर्द कोई हो ,हो जाये पल में हवा 
मुस्कराहट है ऐसी प्रभावी दवा 
दर्द को यूँ अँगूठा दिखाते रहो 
मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो

मुस्कराहट ही बस ऐसी मेहमान है 
जिसकी हर दिल की महफिल से पहचान है 
इस से महफिल दिलो की सजाते रहो 
मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो

सब से बेहतर है भाषा ये संसार की 
खुशबू आती है इस से सहज प्यार की 
खुशबू ए इसकी जी भर लुटाते रहो 
मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो

कई चेहरे हो जाते है इस से निखर 
मुश्किलें चाहे जैसे हो जाये बिखर 
चाहे यूँ ही सही बस निभाते रहो 
मुस्कुराते रहो, मुस्कुराते रहो

सुशील सरित - आगरा 

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