Friday, May 23, 2014

दिल की बात कविता में ....

मन में सुमन खिलते है 
जब ज्ञान की रंग में रंगते 
आपके ज्ञान की हर बिंदु में  
समाया है अनोखा रहस्या
जितना करू मैं  चिंतन
उतना मन में उठे लहरे आनंद के 

मन कभी कभी गुम  रहता है 
तेरी ही यादो में 
तेरी ही बातो में 
लगता है जैसे ये 
सब कल की ही बाते हो

देखता हूँ हर पल तुम्हे 
अपने साथ कभी चिंतन में 
तो कभी नुमा शाम की वेला में  
तो कभी  अमृतवेला में 

मन को अतीन्द्रिय सुख मिलता है 
गध गध  हो जाता हूँ
ये सोच सोच कर 
क्यू इतनी देरी से आपसे मिला 
चलो अब जो हू सो हुआ
दिल कहता है बस
एक बाबा एक मुरली एक मधुबन
और नही कुछ है मुझे भाए...

रमेश .... 

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