Rj Ramesh Hindi kavita
Friday, February 26, 2016
Friday, February 19, 2016
आप जो हम से मिले है
आप जो हम से मिले है
सारा इतिहास याद आ गया
कल तक जो तुझ से अंजान थे सारा इतिहास याद आ गया
जो दिखता नहीं उसे देखने को मजबूर कर दिया
आप जो हम से मिले है
सारा इतिहास याद आ गया
कल तक जो तुझ से अंजान थे सारा इतिहास याद आ गया
धीरे धीरे चल ये आत्मान
धीरे धीरे चल ये आत्मान
धीरे धीरे चलते कभी थक मत जाना प्रभु प्रेम की मस्त हवाओ मे मन बुधि के इस अलौकिक सफर मे एक अनोखी अनदेखी रूहानी राह में प्रभु प्रेम की मस्त हवाओ मे एक अनोखी अनदेखी रूहानी राह में
धीरे धीरे चल ये आत्मान
प्रभु प्रेम की मस्त हवाओ मे एक अनोखी अनदेखी रूहानी राह में | ||||||||||
Thursday, February 18, 2016
जब जब गम के बादल चाह जाते मेरे आसपास..........
जब जब गम के बादल चाह जाते मेरे आसपास
तू मुझे नज़र आता है बाबा मेरे आसपास
जब जब गम के बादल चाह जाते मेरे आसपास
तू मुझे नज़र आता है बाबा मेरे आसपास
हर बार करता हूँ ये भूल अपने को भुलाने की
हर बार आपने बाबा याद दिलाया आत्मा अभिमान की
कैसे करुँ सुक्रिया बाबा तेरे नेक कर्म की
जब जब गम के बादल चाह जाते मेरे आसपास
तू मुझे नज़र आता है बाबा मेरे आसपास
अब हमने सीका जीना
तेरी हर बात को माना
बाबा अब साथ घर है जाना ......
जब जब गम के बादल चाह जाते मेरे आसपास
तू मुझे नज़र आता है बाबा मेरे आसपास
जब जब गम के बादल चाह जाते मेरे आसपास
तू मुझे नज़र आता है बाबा मेरे आसपास
Wednesday, December 10, 2014
दिल की बात कविता में.……बिंदु जैसा रूप है तेरा सागर जैसा ज्ञान।
बिंदु जैसा रूप है तेरा सागर जैसा ज्ञान।
एक तुम्ही भगवान हो बाबा बाकी सब इन्सान।।
जिस घर में रहते हो वो है परमधाम।
उस समय आते हो जब दुनिया बनती है दुःखधाम।।
दुःखधाम को सुखधाम बनाना यही तुम्हारा काम।
सिवाय तुम्हारे कर न सकेगा कोई भी इन्सान।।
बिंदु जैसा रूप है तेरा सागर जैसा ज्ञान।
एक तुम्ही भगवान हो बाबा बाकी सब इन्सान।।
जिस रथ में आते हो वह भागीरथ कहलाये।
भोलेनाथ की सवारी वह नंदीगण कहलाये।।
ब्रह्मा तन में आ देते हो हमको ज्ञान।
खुद ही आकर खुद की तुम देते हो पहचान।।
बिंदु जैसा रूप है तेरा सागर जैसा ज्ञान।
एक तुम्ही भगवान हो बाबा बाकी सब इन्सान।।
जिस युग में आते हो वो संगमयुग कहलाये।
आदि मध्य अन्त का राज हमें समझाये।।
राजयोग सिखला के हम को बनाते हो गुणवान।
वार्ना हम तो रह जाते इस सत्य से अज्ञान।।
ब्रह्मा तन में आ देते हो हमको ज्ञान।
खुद ही आकर खुद की तुम देते हो पहचान।।
एक तुम्ही धनवान हो बाबा एक तुम्ही गुणवान बाबा।
एक तुम्ही भगवान हो बाबा बाकी सब इन्सान।।
सुरेश पवार
Monday, December 8, 2014
दिल की बात कविता में.......स्वर्ग रूप स्वराज में तुम देश मेरा जागने दो।
स्वर्ग रूप स्वराज में तुम देश मेरा जागने दो।
हे प्रभो, इस हेतु ही वरदान यह भी माँगने दो।।
चित हो भयमुक्त जिससे और ऊँचा रह सके सिर।
ज्ञान बाधित हो न जिससे साधना वह साधने दो।।
स्वर्ग रूप स्वराज में तुम देश मेरा जागने दो।
हे प्रभो, इस हेतु ही वरदान यह भी माँगने दो।।
यह हमारी, वह तुम्हरी, यों विभाजित हो न वसुधा।
संकुचित अशक्तियों के घोंसलों को त्यागने दो ।।
स्वर्ग रूप स्वराज में तुम देश मेरा जागने दो।
हे प्रभो, इस हेतु ही वरदान यह भी माँगने दो।।
सत्य की गहरी जड़ों से प्रस्फुटित हों शब्द अपने ।
साधना निज पूर्णता की मत अधूरी छोड़ने दो ।।
स्वर्ग रूप स्वराज में तुम देश मेरा जागने दो।
हे प्रभो, इस हेतु ही वरदान यह भी माँगने दो।।
निःसत्व रूढाचार के वीरान रेगिस्तान में।
विमल प्रज्ञा-स्रोत अपना मत भटकने सूखने दो।।
स्वर्ग रूप स्वराज में तुम देश मेरा जागने दो।
हे प्रभो, इस हेतु ही वरदान यह भी माँगने दो।।
जब विचारों और कर्मो में खिले मन की कली तो।
बस तुम्हारी प्रेरणा को ही हृदय में खेलने दो।।
स्वर्ग रूप स्वराज में तुम देश मेरा जागने दो।
हे प्रभो, इस हेतु ही वरदान यह भी माँगने दो।।
गीतकार - रवीन्द्रनाथ ठाकुर
दिल की बात कविता में। … अमन
… अमन
इस समन्दर से सिमट कर आचमन हो जाईये।
क्या बिगाड़ेगा जगत, खुद में मगन हो जाईये।।
ये जगत तो बांधता है, मोह के जंजाल में
आप ऊपर जाईये, केवल गगन हो जाईये।
जो गुलों की और खारों की सियासत छोड़कर
बस महक अपनी लुटाए वो चमन हो जाईये।
पेहवन, ये पाठ पूजन, सब कथाएँ छोड़कर
राम तुमको गुन गुनाये, वो भजन हो जाईये।
दौड़ करके आज तक, कोई वहाँ पहुँचा नहीं
वो स्वयं आकर मिले, ऐसी लगन हो जाईये।
क्या मोहम्मद, राम , जीजस वो सभी की रोशनी
जो कबीरा में रहा, वो बाँकपन हो जाईये।
मन जहाँ तक साथ है जारी रहेगा ये सफर
छोड़िये भटकान सारे, बस अमन हो जाईये।
कवि - प्रमोद
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