Friday, February 26, 2016

My Collection of Shayaris

सारी उम्र आंखो मे एक सपना याद रहा,
सदियाँ बीत गयी पर वो लम्हा याद रहा,    
ना जाने क्या बात थी उस शख्स में की हम     
सारी मेहफिल भुल गये बस वह चेहरा याद रहा..!!      


इंकार को इकरार कहते हे,
खामोशी को इज़हार कहते हे,
क्या दस्तूर है इस दुनिया का,
एक खूबसूरत सा धोखा हे,
जिसे लोग ‘प्यार’ कहते हे..
 

हर शाम किसी के लिए सुहानी नही होती,
हर प्यार के पीछे कोई कहानी नही होती,
कुछ तो असर होता है दो आत्मा के मेल का,
वरना गोरी राधा, सावले कान्हा की दीवानी न होती..
 

जब कोई ख्याल दिल से टकराता है!
दिल न चाह कर भी, खामोश रह जाता है!
कोई सब कुछ कहकर, प्यार जताता है!
कोई कुछ न कहकर भी, सब बोल जाता है!

 




शायरी पढ़ते पढ़ते खुद लिखना सीख गये,
जीते जीते किसी और के लिए जीना सीख गए,
आँखों आँखों में भी बातें  होती है,
आज कल उन बातों को भी पढ़ना सीख गए..





 
पास आपके दुनिया का हर सितारा हो,
दूर आपसे गम का हर किनारा हो,
जब भी आपकी पलके खुले सामने वही हो,
जो आपको दुनिया में सबसे प्यारा हो..     

 

Friday, February 19, 2016

आप जो हम से मिले है

आप जो हम से मिले है 
सारा इतिहास याद आ गया
कल तक जो तुझ से अंजान थे
आज वही वालैकुम सलाम हो गये
बिछड़े ऐसे थे जैसे कभी मिले ही नहीं
मिले ऐसे है जैसे कभी बिछड़े ही नहीं
खेल तूने कैसा रचा है
जो समझ समझ कर न समझ पाये
देह के रस्मो रिवाज़ की इस दुनिया में
आत्मा का परिवाहन से दूर हुवे थे
तेरी जादू भरी नज़र ने सब कुछ भुला दिया
जो दिखता नहीं उसे देखने को मजबूर कर दिया
आप जो हम से मिले है 
सारा इतिहास याद आ गया
कल तक जो तुझ से अंजान थे
आज वही वालैकुम सलाम हो गये


धीरे धीरे चल ये आत्मान

Thursday, February 18, 2016

जब जब गम के बादल चाह जाते मेरे आसपास..........

जब जब गम के बादल चाह जाते मेरे आसपास
तू मुझे नज़र आता है बाबा मेरे आसपास
एक बार नहीं कही बार का ये मेरा अनुभव
देह भान का ही ये खेल सारा ..
ज्ञान अमृत पिलाकर आपने कर दिया होशियार
जब जब गम के बादल चाह जाते मेरे आसपास
तू मुझे नज़र आता है बाबा मेरे आसपास
हर बार करता हूँ ये भूल अपने को भुलाने की
हर बार आपने बाबा याद दिलाया आत्मा अभिमान की
कैसे करुँ सुक्रिया बाबा तेरे नेक कर्म की
जब जब गम के बादल चाह जाते मेरे आसपास
तू मुझे नज़र आता है बाबा मेरे आसपास
अब हमने सीका जीना 
तेरी हर बात को माना
बाबा अब साथ घर है जाना ......
जब जब गम के बादल चाह जाते मेरे आसपास
तू मुझे नज़र आता है बाबा मेरे आसपास
जब जब गम के बादल चाह जाते मेरे आसपास
तू मुझे नज़र आता है बाबा मेरे आसपास


Wednesday, December 10, 2014

दिल की बात कविता में.……बिंदु जैसा रूप है तेरा सागर जैसा ज्ञान।



बिंदु जैसा रूप है तेरा सागर जैसा ज्ञान। 
एक तुम्ही भगवान हो बाबा बाकी सब इन्सान।।

जिस घर में रहते हो वो है परमधाम। 
उस समय आते हो जब दुनिया बनती है दुःखधाम।। 

दुःखधाम को सुखधाम बनाना यही तुम्हारा काम। 
सिवाय तुम्हारे कर न सकेगा कोई भी इन्सान।।

बिंदु जैसा रूप है तेरा सागर जैसा ज्ञान। 
एक तुम्ही भगवान हो बाबा बाकी सब इन्सान।।

जिस रथ में आते हो वह भागीरथ कहलाये। 
भोलेनाथ की सवारी वह नंदीगण कहलाये।।

ब्रह्मा तन में आ देते हो हमको ज्ञान। 
खुद ही आकर खुद की तुम देते हो पहचान।।

बिंदु जैसा रूप है तेरा सागर जैसा ज्ञान। 
एक तुम्ही भगवान हो बाबा बाकी सब इन्सान।।

जिस युग में आते हो वो संगमयुग कहलाये। 
आदि मध्य अन्त का राज हमें समझाये।।

राजयोग सिखला के हम को बनाते हो गुणवान। 
वार्ना हम तो रह जाते इस सत्य से अज्ञान।।

ब्रह्मा तन में आ देते हो हमको ज्ञान। 
खुद ही आकर खुद की तुम देते हो पहचान।।

एक तुम्ही धनवान हो बाबा एक तुम्ही गुणवान बाबा। 
एक तुम्ही भगवान हो बाबा बाकी सब इन्सान।।

सुरेश पवार 


Monday, December 8, 2014

दिल की बात कविता में.......स्वर्ग रूप स्वराज में तुम देश मेरा जागने दो।

स्वर्ग रूप स्वराज में तुम देश मेरा जागने दो। 
हे प्रभो, इस हेतु ही वरदान यह भी माँगने दो।।  

चित हो भयमुक्त जिससे और ऊँचा रह सके सिर। 
ज्ञान बाधित हो न जिससे साधना वह साधने दो।।
स्वर्ग रूप स्वराज में तुम देश मेरा जागने दो। 
हे प्रभो, इस हेतु ही वरदान यह भी माँगने दो।।

यह हमारी, वह तुम्हरी, यों विभाजित हो न वसुधा। 
संकुचित अशक्तियों के घोंसलों को त्यागने दो ।।
स्वर्ग रूप स्वराज में तुम देश मेरा जागने दो। 
हे प्रभो, इस हेतु ही वरदान यह भी माँगने दो।।

सत्य की गहरी जड़ों से प्रस्फुटित हों शब्द अपने ।
साधना निज पूर्णता की मत अधूरी छोड़ने दो ।।
स्वर्ग रूप स्वराज में तुम देश मेरा जागने दो। 
हे प्रभो, इस हेतु ही वरदान यह भी माँगने दो।।

निःसत्व रूढाचार के वीरान रेगिस्तान में। 
विमल प्रज्ञा-स्रोत अपना मत भटकने सूखने दो।।
स्वर्ग रूप स्वराज में तुम देश मेरा जागने दो। 
हे प्रभो, इस हेतु ही वरदान यह भी माँगने दो।।

जब विचारों और कर्मो में खिले मन की कली तो। 
बस तुम्हारी प्रेरणा को ही हृदय में खेलने दो।।
स्वर्ग रूप स्वराज में तुम देश मेरा जागने दो। 
हे प्रभो, इस हेतु ही वरदान यह भी माँगने दो।।

गीतकार - रवीन्द्रनाथ ठाकुर 

दिल की बात कविता में। … अमन

 … अमन 


इस समन्दर से सिमट कर आचमन हो जाईये। 
क्या बिगाड़ेगा जगत, खुद में मगन हो जाईये।।
ये जगत तो बांधता है, मोह के जंजाल में 
आप ऊपर जाईये, केवल गगन हो जाईये।
जो गुलों की और खारों की सियासत छोड़कर 
बस महक अपनी लुटाए वो चमन हो जाईये। 
पेहवन, ये पाठ पूजन, सब कथाएँ छोड़कर 
राम तुमको गुन गुनाये, वो भजन हो जाईये। 
दौड़ करके आज तक, कोई वहाँ पहुँचा नहीं 
वो स्वयं आकर मिले, ऐसी लगन हो जाईये। 
क्या मोहम्मद, राम , जीजस वो सभी की रोशनी 
जो कबीरा में रहा, वो बाँकपन हो जाईये। 
मन जहाँ तक साथ है जारी रहेगा ये सफर 
छोड़िये भटकान सारे, बस अमन हो जाईये। 


कवि - प्रमोद