Friday, July 4, 2014

दिल की बात कविता में…………तुम सवरते रहना।

तुम सवरते रहना।  


श्याम की तरह तुम सवारना 
सुबह की तरह तुम चमकना 
तुम्हें सवरते देखना 
अच्छा लगता है 
तुम्हे चमकते देख मैं 
भी तरोताजा महसूस करता हूँ 
तुम सवरते रहना। 

कल रात सपनों में देखा 
जैसे आसमान की परी थी 
हमने पूछा कैसे हो आप 
परी ने कहा हम तो अच्छे है 
बस आपका हाल देखने आये थे 
यु मिलाना आसान न सही 
कभी सपनों से एक मुलाकात सही 
तुम सवरते रहना। 

आँखे खुली मेरी आहट से 
देखने लगा परी को पर कुछ नहीं था 
तब समझा याद ने 
याद को यादों से मिला दिया है। 
तुम सवरते रहना। 

बिना किये कोई हलचल 
न कोई बात फिर भी 
देखो मिलन का ये मेला चला 
हम सोचते थे शयद वक़्त आने 
पर  हम से रूबरू होंगे। 
ये बात वक़्त के पार हुआ 
बिना किसी तार के बात हुआ। 
तुम सवरते रहना। 


No comments:

Post a Comment