Tuesday, July 8, 2014

दिल की बात कविता में। …अन्तर मन में देख ज़रा



जब जब तेरी बाते सुनता हूँ 
मेरा अन्तर मन शुद्ध हो जाता है 
दिल बिना सोचे ही कहता है 
अन्तर मन  में देख ज़रा

सांसों की इस माला में 
जब तेरी याद बस जाती है 
हर सांसों साँस को सुकून मिलता है 
दिल कहता है अब  
अन्तर मन  में देख ज़रा

कही जन्मो से भटकता रहा 
जब मिला तुझ से 
सारी थकान मिट गयी पल में 
और हो गया दर्शन चारों धाम के 
दिल कहता है अब 
अन्तर मन  में देख ज़रा

रावण वाली लंका को ढूंढ़ता था 
अब मैं ने जाना वो बाहर नहीं 
वो तो मेरे अंदर छुपा है 
अब न कोई गम किसी बात का 
हर बात की सलाह है तू 
तुझे पाकर मैंने पाये तीनों लोक 
दिल कहता है अब 
अन्तर मन  में देख ज़रा  

मन ही माया मन ही पूजा 
मन का ही खेल सब रे 
मन को करो अब प्रभु अर्पण 
हो जाओ मन जीत 
बनो अब जगत जीत 
दिल कहता है अब 
अन्तर मन  में देख ज़रा

Rj Ramesh

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