आपकी राहा में हम। …
आपको की राहा में चलना
यु आसान नहीं था
पर तुम्हे चलते देखकर चलते रहे हम
रास्ते देख कर कभी सोचा न था
कि हमें इस रास्ते जाना है
पर तुम्हे जाते देखकर आगे बढ़ते रहे हम
ऊँची मंजिल की कभी कल्पना ना थी
यु उड़ान भरना ख़यालो न था
पर आपको उड़ते देख, उड़ान भर रहे है हम
अब लगता है जैसे साथ तो है हम
पर मेरे और आपके चलने में
कुछ अहसास और समय का विलंब था
इस लिये कभी आप आगे, तो पीछे रह जाते हम
इन्तज़ार उस घडी की आप को भी है
और हमको भी जहाँ हम दोनों के कदम साथ चले
मंजिल आये न आये
पर ख़ुशी इस बात की होगी
अकेले नहीं अब, साथ साथ है हम
रमेश
No comments:
Post a Comment