मैं मास्टर गणेश हूँ। …
ओम शांति
वैसे देखा जाय तो गणेश जी महीमा बहुत है उनके स्वरूप एक अलंकारी स्वरुप है उनके चहरे की अकृति गजमुख की है और पेट को लंबोदर कहते है और इन सब के बाद भी उनका वाहन एक चूहा है। …
इन सब बातों को देखने के बाद जरूर चिन्तन चेलगा और ये एक सुन्दर अध्यात्मिक चिन्तन का विषय है।
. तो चलो कुछ देर के लिए हम इस आध्यात्मिक चिंतन में खो जाते है। … Music …।
गणेशजी याने एक गुणवान व्यक्तिव की छवी का प्रतिक है हर अंग एक विशेष गुण और शक्ति का प्रतिक है।
आज उनके पेट याने जिसे लंबोदर कहते है। ये समाने की शक्ति का प्रतिक है।
गणेश जी को कोई भी बात बताने से वह बात उनके अन्दर समा जाता वो किसी और को कभी नहीं बताते।
इस लिए उनके इस गुण के कारण उन्हें लंबोदर के नाम से याद भक्ति मार्ग में आज भी किया जाता है।
और आज से पांच हज़ार साल पहले गणेश जी ने ये गुण और शक्ति परमात्मा से पाया था।
तो क्यों न आज में भी और आप भी इस शक्ति को परमात्मा से पा ले ...................
तो चलो। ………… अपने मन और बुद्धि के विमान द्वारा इस पांच तत्वों से पार परमधाम की ओर
आकाश से परे नीले बादलों के पार। …………………
शुक्ष्म लोक मैं जहाँ प्यारे बाबा हमारा इंतज़ार कर रहे है। ………………
मैं आत्मा इस संसार में अलग अलग नाम रूप से पाठ बजा कर वर्तामन में इस रूप में हूँ। अब मुझे इस बात
का ज्ञान हो गया है। में आत्मा परमधाम से आकर यहाँ पर पाठ बजाया है। अब फिर से परमधाम जाकर
शक्ति प्राप्त कर देव स्वरूप बनना है। और फिर पाठ बजाना है। मेरा ही गायन और पूजन अब तक चल रहा
है। मुझे सब कुछ याद आ गया है। ……… प्यारे बाबा आपका सुक्रिया मिठे बाबा आपका सुक्रिया। …
मैं आत्मा इस आवाज़ की दुनिया से दूर नीले आकाश की ओर मन और बुद्धि से उड़ान करते हुवे। …
बहुत ही ऊपर पांच तत्वों से पार शुक्ष्म लोक में पहुँच गयी हूँ।
यहाँ चारो और शांति ही शांति है। प्यारे बापदादा मेरा बाहें पसारे मेरा स्वागत कर रहे है। ऐसा लग रहा है जैसे
बापदादा बस सिर्फ और सिर्फ मेरा ही इंतज़ार में खड़े है मैं उनसे मिलकर अलौकिक आनन्द में खो गया हूँ
मेरे अंदर कोई शब्द नहीं है। इस रूहानी प्रेम का , इस रूहानी प्यार का किन शब्दों में वर्णन करू। ...................
बस दिल कहता है बाबा तुम्हें देखता राहु। ................( गीत की कुछ लाइन सुना सकते है )
अब बापदादा मुझे कहा रहे है , - " आओ मेरे प्यारे बच्चे आओ तुम्हीं मेरे गणेश स्वरूप बच्चे हो तुम्हीं ज्ञान स्वरूप मेरे बच्चे हो तुम्ही मेरे मास्टर शक्तिवान बच्चे हो। … आओ आओ आपका स्वागत है " कहते हुवे बाबा मुझे अपने साथ लेकर चलने लगे और ऊपर की तरफ। ……… और जैसे ही मेरा हाथ बाबा ने पकड़ा मैं अशरीरी बन गया
मैं बिन्दु स्वरुप में समां गया। मैं एक लाइट और माइट में खो गया।
कुछ देर इस आवस्था में डूबे रहे…………………
में आत्मा भरपूर बन गया हूँ शक्ति से भरपूर बहुत हल्का महसूस कर रही हूँ। शान्ति की शक्ति से भरपूर। ...................
मुझे याद आ गया। .… हाँ हाँ में ही मास्टर गणेश हूँ। मेरा ही गायन पूजन वर्तामन में हो रहा है। ये शक्ति
और ऐसा गुणवान बनाने वाले कोई और नहीं वो मेरे अलौकिक पिता परमात्मा शिव बाबा है।
शिव बाबा आपका दिल से धन्यवाद , सुक्रिया बाबा मैं अपने इस पवित्र स्वरूप में रहकर श्रेष्ठ कर्म करुँगी
सुक्रिया बाबा सुक्रिया बाबा
ओम शांति ओम शांति ओम शान्ति. …………
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