Monday, March 31, 2014

दिल की बात कविता में - ' अच्छा नहीं लगता '

 ' अच्छा नहीं लगता '

मन का खेल जानु मै 
मन जीते जीत है 
पर जानकर भी अन्जान 
क्यों कि आज कुछ भी 
अच्छा नहीं लगता

कल बहुत अच्छा था 
सोचकर आगे बड़े 
ज्यादा सुख कि कामना 
सब कुछ है  आज फिर भी
अच्छा नहीं लगता

क्या अच्छा क्या बुरा 
इसी धुन में बड़ी हैरानी 
कल जो अच्छा था 
आज वही बुरा बना 
इस लिए आज फिर 
अच्छा नहीं लगता

मै काहु एक बात 
क्यों उलझे हम 
मेरा तेरा में अच्छा  बुरा में 
सब है उसका 
जो सब का रखवाला 
उसी को  सौप दो सब कुछ 
फिर देखो सब अच्छा लगेगा 
और अब नहीं कहना 
अच्छा नहीं लगता


Tuesday, March 25, 2014

दिल की बात कविता में - " प्यार बाँटते चलो "

प्यार बाँटते चलो


पैसा या ताकत से नहीं बनता हर कार्य 
बस प्यार से प्रेम से करो ईबादत  
प्यार से होता हर कार्य आसान 
प्यार बाँटते चलो।।

यह हर इन्सान है प्यासा 
यह हर कोई है तरसा 
बच्चे जवान बड़े सब है  
दीवाने प्यार के 
प्यार बाँटते चलो।।

सब की चाहत एक 
सब की मंज़िल एक 
सब का लक्ष्य एक 
बस कुछ भी हो जाय 
मिले प्यार हर जगह से 
प्यार बाँटते चलो।।

चलो आज ईश्वर से 
पा ले इतना प्यार 
भर ले अपने मन को 
पुरे दिल में बस हो
प्यार ही प्यार।। 

तब ही होगा इस संसार का उद्धार 
फिर ना कोई माँग होगी 
फिर ना कोई माँगता फिरेगा 
और ना कोई किसी से लड़ेगा 
सब तरफ होगा प्यार ही प्यार 
प्यार बाँटते चलो।।




Saturday, March 22, 2014

A Motivational Song - " तू न जाने आस पास हैं खुदा "

धुंधला जाएँ जो मंजिलें, इक पल को तू नज़र झुका
झुक जाये सर जहाँ वहीं, मिलता हैं रब का रास्ता
तेरी किस्मत तू बदल दे, रख हिम्मत बस चल दे
तेरा साथी, मेरे क़दमों के हैं निशां
तू न जाने आस पास हैं खुदा

खुद पे डाल तू नज़र, हालातों से हार कर कहाँ चला रे
हाथ की लकीर को, मोड़ता मरोड़ता है हौसला रे
तो खुद तेरे ख्वाबों के रंग में, तू अपने जहाँ को भी रंग दे
के चलता हूँ मैं तेरे संग में
हो शाम भी तो क्या
जब होगा अँधेरा, तब पायेगा दर मेरा
उस दर पे फिर होगी तेरी सुबह
तू न जाने...

मिट जाते हैं सबके निशां
बस एक वो मिटता नहीं हाय
मान ले जो हर मुश्किल को
मर्ज़ी मेरी हाय
हो हमसफ़र न तेरा जब कोई
तू हो जहाँ, रहूँगा मैं वहीं
तुझसे कभी न इक पल भी मैं जुदा
तू न जाने...

Flim - 






Monday, March 17, 2014

दिल की बात कविता में - " होली का मौसम आया है। "

होली का मौसम आया है। 

सब के मन से छूट रही है। 
खुशियों कि फूलजड़ीया 
होली का मौसम आया है।

उम्र कि बात नहीं यहाँ 
छोटा - बड़ा  ना कोई अब 
सारे ही मस्त है लिये हाथो में गुलाल 
सब के मन से छूट रही है। 
खुशियों कि फूलजड़ीया 
होली का मौसम आया है।

कहने कि जरूरत नहीं 
पर कहना चाहूँगा 
होली का त्यौहार पर जो 
ख़ुशी आपके दिल में आती 
सब कुछ भूल जायो भले 
लेकिन ख़ुशी को याद रखो उम्र भर 
सब के मन से छूट रही है। 
खुशियों कि फूलजड़ीया 
होली का मौसम आया है।

Friday, March 14, 2014

दिल की बात कविता में - " कब तक चुप रहना है

कब तक चुप रहना है   

बात यु तो बन न सके 
उन्हें कुछ अच्छा लगता नहीं 
 मेरा दिल भी मानता नहीं
 कब तक चुप रहना है

हर गाली कि बात यही है 
हर सुबह कि कहानी यही है 
गाली में पड़ा कचरा उठायेगा कौन 
किसे कहे कौन सुनता है  
कब तक चुप रहना है

हर घर की कहानी एक 
माँ बच्चों से कुछ कहना चाहती है 
बच्चें माँ से कुछ कहना चाहते है 
पर कैसे कहे और कैसे सुनाए 
कब तक चुप रहना है

सुनो जी मै अपनी दिल कि कहता हूँ 
कोई समझे या ना समझे 
कोई सुने या न सुने पर कहता हूँ मै 
सब से अपनी दिल कि बात 
कब तक चुप रहना है

अब छोड़ो भी तुम चुप रहना 
समय बीतता जा रहा है 
क्यों की अभी नहीं तो कभी नहीं 
कह देना जो कहना चाहते हो 
कब तक चुप रहना है
कब तक चुप रहना है


Wednesday, March 12, 2014

दिल की बात कविता में - " शिव की महिमा "

" शिव की महिमा "



राम नहीं कृष्णा नहीं सदा शिव 
जन्म में नहीं मरन में नहीं सदा मुक्त अवस्था में 
साकार नहीं आकार नहीं सदा निराकार में 
मनुष्य लोक में नहीं सूक्ष्म लोक में नहीं सदा ब्रह्म लोक में 
कलयुग में नहीं सतयुग में नहीं सदा संगम युग में 
आदि नहीं अन्त नहीं सदा अविनाशी 
राम अवतार में नहीं कृष्ण अवतार में नहीं सदा साकार मनुष्य तन में 
पतित नहीं पावन नहीं सदा पावन 
ना धर्म आत्मा ना महात्मा सदा परम आत्मा 
ना तो गुरु ना जगत गुरु सदा परम सतगुरु 
ना शास्त्र सुनाते ना बाइबिल सुनाते सदा गीता ज्ञान सुनाते 
ना गंगा अमृत पिलाते ना चरणा अमृत पिलाते सदा ज्ञान अमृत पिलाते 
ना कण कण वाशी ना सर्व व्यापी सदा परमधाम निवाशी  
ना अमरनाथ यात्रा सिखाते ना चारों धाम कि यात्रा सिखाते 
वो सदा रूहानी याद कि याद सिखाते 
ना आकार को याद करो ना साकार को याद करो 
सदा निराकार शिव को याद करो 


दिल की बात कविता में - " कल श्याम एक दिया को देखता रहा "


कल श्याम एक दिया को देखता रहा 
कुछ अपनी कुछ दिल कि 
कुछ अपनों कि कुछ औरो कि 
बातें याद आते रहे 
कल श्याम एक दिया को देखता रहा 

सोचा था कुछ पल शान्ति में 
खो जाऊ और भूल जाऊ दूनिया को 
पर बैठते ही सोच से विपरित हुआ 
कल श्याम एक दिया को देखता रहा 

कुछ  हवा तेज थी
दिये कि लौह भी हल चल में थी
समय के साथ हवा का रुख
बदल गया और श्याम रहनुमां बना
कल श्याम एक दिया को देखता रहा

विचारों कि हल चल भी कम हुआ
मै एकान्त वास गया
जैसे दिए कि लौह रुख गया
मै किसी आलोक में खो गया
सन्नाटा ,  शान्ति , शान्ति और सत्यचित 
कल श्याम एक दिया को देखता रहा





Tuesday, March 11, 2014

दिल की बात कविता में - " दूर हम कर न सके "

लाख कोशिश करने के बाद
जिन बुराईयों को दुनिया से
हम हटाना चाहते थे
दूर हम कर न सके

कोई बात थी कही छुपी 
जिस तक हम पहुँच न सके
हम ही नहीं औरो ने भी
कोशिश की पर
दूर हम कर न सके

बहुत प्रयास के बाद
हम हार मान कर बैठे थे
तब कुछ हलचल
हुई मेरे मन के अंदर
कोशिश अब न थी
कुछ अहसहस था 

शयद कुछ इस तरह से हुआ
में समझ गया था
जिसे में बहार से हटाने कि
कोशिश कर रहा था
बस वो मेरे अन्दर था
और मैंने अन्दर से उसे
अब हटा दिया है

एक और बात यु समझ
में मेरे आया
यहाँ हर दिन कोई न कोई 
बात आती जरुर है 
बस उसे बहार से  नहीं
अन्दर से अपने मन से 
हटाना होता है 
तब हम उसे दूर कर सकते है 



Monday, March 10, 2014

दिल की बात कविता में - " कभी हाँ कभी ना "


जीवन के इस सफ़र में 
कभी हाँ तो कभी ना 

कभी अपनों से कभी ग़ैरो से 
कहना ही होता है 
जीवन के इस सफ़र में 
कभी हाँ तो कभी ना 

सुबह और श्याम चाहे 
कोई हो काम या ना हो पर 
कहना ही होता है 
जीवन के इस सफ़र में 
कभी हाँ तो कभी ना 

दिन रात के इस फेरे में 
मन के इस घेरे में 
हर बार में सोच यही चलता 
कभी हाँ कभी ना
जीवन के इस सफ़र में 
कभी हाँ तो कभी ना 

बात बहुत पुरानी हो या नई 
लेकिन मन फिर भी सोचे 
कहना था जिसे हाँ उसे कहा दिया ना 
और जिसे कहना था ना उसे कहा दिया हाँ 
कहना ही होता है 
जीवन के इस सफ़र में 
कभी हाँ तो कभी ना 

जीवन के इस सफ़र में 
कभी हाँ तो कभी ना 

Sunday, March 9, 2014

दिल की बात कविता में - " समय के साथ चलते चलते "


समय के साथ चलते चलते एक वक्त ऐसा आता है
जहा हर बात को सही तरीके से समझना आता है 

घड़ी दो घड़ी प्यार के कुछ लम्हे ही सही
जीवन को मज़बूत और ससक्त बनता है
आप चाहे जिस भी लक्ष को लेकर चले हो
उस मे प्यार मिलता है तो सब कुछ अच्छा लगता है
फिर हर मुश्किल आसान हो जाता है

समय के साथ चलते चलते एक वक्त ऐसा आता है 
जहा हर बात को सही तरीके से समझना आता है

कदम दो कदम तुम्हारा साथ क्या मिला
कुछ पल के लिया लगा जैसे हम जन्नत मे है
ये हम सफर मेरे मे जनता हु
कुछ मुश्किलें  तुमहारी है कुछ मुश्किलें  मेरी भी है
जो श्याद प्यार को मज़बूत करने के लिये है
हम हर मुशकिल मे साथ चलते रहंगे
एक नये गीत और नये तरानों  के साथ
जीएंगे  एक नये अंदाज़ से 

समय के साथ चलते चलते एक वक्त ऐसा आता है
जहा हर बात को सही तरीके से समझना आता है

दिल की बात कविता में - " सुखो कि खोज में आज "


सुखो कि खोज में आज 
मानव और ही दुखी दिखाई देता है 
वो इस लिए शायद उसे ही पता नहीं है
उसकी खोज या तलाश ख़त्म कब होगी
बस दौड़ रहा है एक अंधेरे सड़क पर

सुखो कि खोज में आज 
मानव और ही दुखी दिखाई देता है 
एक राज कि बात अगर समझे
तो खोज या तलाश कि जरुरत नहीं है
कुदरत ने वो सब कुछ आपको दिया है
बस उसे समझ कर जीना है
जो कुछ आपके पास है उस का उपयोग करो
और घर परिवार में समय दे
तो सुख अपने आप पाएंगे
क्यों कि ईश्वर ने ये संसार
बनाया है वो सोच समझ कर ही बनाया है

सुखो कि खोज में आज 
मानव और ही दुखी दिखाई देता है 
तो चलिए एक बार इस तरह का प्रयोग करे
जो कुछ आपके पास है उसका आनंद ले
और अनुभव करे फिर देखना
आपके मुख से ईश्वर का धन्यवाद निकलेगा
किसी ने ठीक कहा है धन्यवाद करो उसके लिए
जो है और जो नहीं उसके लिए भी धन्यवाद
ये भी एक अनोखा मन्त्र है सुख से जीने का
इस के लिए भागों नहीं रुको और अनुभव करो 

सुखो कि खोज में आज 
मानव और ही दुखी दिखाई देता है 


दिल की बात कविता में - "आज श्याम कुछ खोज रहा था"


आज श्याम कुछ खोज रहा था
और हाथ मेरे तुम्हारी एक तस्वीर लगी

बस तस्वीर क्या मिली
मै देखते देखते खो गया
यादो के मेले मे यू
श्याम कब डल गयी
कुछ पता नही चला

आज श्याम कुछ खोज रहा था
और हाथ मेरे तुम्हारी एक तस्वीर लगी

रात नींद कब आ गया
कुछ पता ना चला
बस लेटते ही सपनो
की दुनिया मे खो गया
नया दौर यादो का चलता गया

आज श्याम कुछ खोज रहा था
और हाथ मेरे तुम्हारी एक तस्वीर लगी 


दिल की बात कविता में - "सुखु मिला है मुझे तेरी ईबादत में"



सुखु मिला है मुझे तेरी ईबादत में
हर गम और दुःख दूर हुआ एक पल में

तेरी बाते तेरी राहे मुझे नयी दिशाए दिखाते
चलने कि रूह से परेणा मिलती है
पर बड़ा असंतोष होता हूँ तब 
जब मन का साथ नहीं मिलता। ....

सुखु मिला है मुझे तेरी ईबादत में
हर गम और दुःख दूर हुआ एक पल में

सुबह कि नयी किरणो से मिलता
मुझे एक नयी शक्ति तब लगता
जैसे में करूँगा तेरी ईबादत हर पल
वक्त के चलते फिर वाही बात
पर बड़ा असंतोष होता हूँ तब 
जब मन का साथ नहीं मिलता। ....

सुखु मिला है मुझे तेरी ईबादत में
हर गम और दुःख दूर हुआ एक पल में 



दिल की बात कविता में - " जब भी मै सुबह उठता हूँ "



जब भी मैं सुबह उठता हूँ 
तुम्हरी आँखों का वो नूर नज़र आता है

एक अनोखा अदृश्य शक्ति
मेरे अंदर भर देती है
मैं पूरे दिन के लिए एक ख़ुशी
और नये अहसास के साथ जी उठता हूँ 

जब भी में सुबह उठता हूँ 
तुम्हरी आँखों का वो नूर नज़र आता है

हज़ारो लोग है इस दुनिया में
पर तुम सब से जुड़ा हो
तुम्हरी बात अलग है
बस अब तुम मेरे हो और में तुम्हारा हूँ 

जब भी में सुबह उठता हूँ 
तुम्हरी आँखों का वो नूर नज़र आता है

दिल की बात कविता में - "मुझे चित्र देखना बहुत पसंद है"

मुझे चित्र देखना बहुत पसंद है
शायद आपको भी पसंद है
हम सब को चित्र देखना इस लिए
पसंद है क्यों की ये दुनिया भी एक चित्र है
और हम सब उस बड़े चित्र में है
जिसे ईश्वर ने बनाया है

मुझे चित्र देखना बहुत पसंद है
शायद आपको भी पसंद है
दुनिया रूपी इस बड़े चित्र के
हम सब एक हिस्से है
पर जिन चित्रों को हम देखते है
वो जड़ है और हम चैतन्य है
शायद ईश्वर ने जब इस
दुनिया का चित्र बनाया होगा
उस समय उसने ये बदलाव किया होगा

मुझे चित्र देखना बहुत पसंद है
शायद आपको भी पसंद है
में जब इस तरह सोचने लगा
आखिर ईश्वर ने बदलाव किस लिए
किया होगा ? ये सवाल मन में
आते ही आकाश में हलचल हुई और
एक सुन्दर लिखत मुझे दिखाई दिया वो था। .
" क्यों कि में तुम से बहुत प्यार करता हूँ।  "

मुझे चित्र देखना बहुत पसंद है
शायद आपको भी पसंद है
ईश्वर कि उस लिखत को देख में
कुछ देर के लिए खो  गया मन
बेहद गदगद और आनंद से भर गया
और रोम रोम से एक ही आवाज़ आयी
हे ईश्वर आपका धन्यवाद ,शुक्रिया …
मुझे चित्र देखना बहुत पसंद है

शायद आपको भी पसंद है