Sunday, April 27, 2014

दिल की बात कविता में ' छोटी सी ज़िन्दगानी मेरी '

छोटी सी ज़िन्दगानी मेरी 
एक रिस्ता हो प्यार का 
जहाँ बतिया हो दिल का 
जहाँ कोई शिक़वा न हो 
छोटी सी ज़िन्दगानी मेरी 

रोने की कोई बात न हो 
मुस्कुराने के बहाने हो 
गम भुलाने का मन्जर हो 
खुश मिज़ाज चेहरे हो 
छोटी से ज़िन्दगानी मेरी 

राहे चाहे कठिन हो 
चलने में मौज़ हो 
आज धुंधला सा मौसम 
कल वाही बाहार हो 
सपने सच हो न हो 
पर आँखों में हो सपना सदा 
छोटी सी ज़िन्दगानी मेरी 

Saturday, April 26, 2014

दिल की बात गीतों में - " आदमी मुसाफिर है, आता है, जाता है "



आदमी मुसाफिर है, आता है, जाता है
आते जाते रस्ते में, यादें छोड जाता है

झोंका हवा का, पानी का रेला
मेले में रह जाये जो अकेला
फिर वो अकेला ही रह जाता है
आदमी मुसाफिर है...

कब छोड़ता है, ये रोग जी को
दिल भूल जाता है जब किसी को
वो भूलकर भी याद आता है
आदमी मुसाफिर है...

क्या साथ लाये, क्या तोड़ आये
रस्ते में हम क्या-क्या छोड़ आये
मंजिल पे जा के याद आता है
आदमी मुसाफिर है...

जब डोलती है, जीवन की नैय्या
कोई तो बन जाता है खिवैय्या
कोई किनारे पे ही डूब जाता है
आदमी मुसाफिर है...


Movie/Album: अपनापन (1977)
Music By: लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
Lyrics By: आनंद बक्षी
Performed By: लता मंगेशकर, मो.रफ़ी


Thursday, April 24, 2014

दिल की बात कविता में - ' कोई सपना आया था '


कोई सपना आया था  
    

रात में सो जाता था 
माँ की लोरी सुन 
उनके ही गोद में 
मीठी तपकियो के साथ 
बचपन के वो दिन 
वो भी क्या दिन थे 
कुछ याद नहीं है  
कोई सपना आया था  


मुझे कब कुछ करना था 
मेरे साथ तो माँ का साया था 
हर पल हर लम्हा 
मैं जगाते सोते बस 
एक तस्वीर देखता 
कुछ याद नहीं है  
कोई सपना आया था  


आज माँ नहीं मेरे पास 
आज नीन्द को तरस गयी है आँखे 
बहुत कोशिश करते है सोने की 
पर वो मीठा ऐहसास 
वो मीठी तपकिया कहाँ 
शायद लगता है अब 
नया जन्म लेना होगा 
कुछ याद नहीं है  
कोई सपना आया था  


Wednesday, April 23, 2014

दिल की बात कविता में - मेल करने को बैठे थे

दिल की बात कविता में - मेल करने को बैठे थे


मेल करने को बैठे थे  
पर क्या लिखे और कैसे लिखे 
लिखने लगा तुम्हरी याद से 
याद भी याद दिलाती है 
यादो के इस मेले में जीवन गुजर जाता है 
सच्चे दिल की चाहना 
साथ हो तो हर मुश्किल में राह निकलता है 
तुम वहाँ से याद भेजना 
हम यहाँ से याद भेज रहे है 
तुम वहाँ अपना ख्याल रखना 
हम यहाँ अपना ख्याल रखेंगे 
तुम वहाँ समय पर कार्य करना 
हम यहाँ समय पर कार्य करेंगे 
तुम वहाँ सब के साथ ख़ुशी बाटो 
हम यहाँ सब के साथ ख़ुशी बटेंगे 
जब मौसम बदल जाय 
तो मिलने की दुवा करना 
फिर साथ मिलकर 
पुरे जहान में  प्यार लुटाएंगे 
मेल करने को बैठे थे  
पर क्या लिखे और कैसे लिखे 
लिखने लगा तुम्हरी याद से 
याद भी याद दिलाती है 

दिल की बात गीतों में - संसार की हर शय का इतना ही फ़साना है



संसार की हर शय का इतना ही फ़साना है
एक धुँध से आना है, एक धुँध में जाना है

ये राह कहाँ से है, ये राह कहाँ तक है
ये राज़ कोई राही समझा है न जाना है
संसार की हर शय का...

एक पल की पलक पर है, ठहरी हुई ये दुनिया
एक पल के झपकने तक हर खेल सुहाना है
संसार की हर शय का...

क्या जाने कोई किस पल, किस मोड़ pe क्या बीते
इस राह में ऐ राही, हर मोड़ बहाना है
संसार की हर शय का...

हम लोग खिलौने हैं, एक ऐसे खिलाड़ी के
जिसको अभी सदियों तक, ये खेल रचाना है
संसार की हर शय का...




Movie/Album: धुंध (1973)
Music By: रवि
Lyrics By: साहिर लुधियानवी
Performed By: महेंद्र कपूर

Tuesday, April 22, 2014

दिल की बात कविता में - ' सत्य का बोल बाला हो '

सत्य का बोल बाला हो  

सत्य आज जरूर कड़वा लगे
पर वक्त के साथ मीठा लगे
सत्य गुण को जीवन में अपनालो
और कोई चारा है न कोई रास्ता है
सत्य का बोल बाला हो

सोच के भी मन विचलित है
आज सत्य के बजाय
झूठ से काम हो आसान
ये कैसा धुंद सब के मन में छाया है
सत्य का बोल बाला हो

पैसों के ख़ातिर झूठ का सहारा
अरे भाई येही है लूट का मन्ज़र
पैसों से मिले सुख के साधन अपार
आज तक नहीं कोई खरीद पाया
सच्चा सुख शांति प्यार
सत्य का बोल बाला हो

चलो आओ आज सोचे
कैसे मिले हमें सच्चा सुख
मैं कहता हु बहुत नहीं बस
एक सत्य का गुण अपनालो
सच्चा सुख शांति प्यार
ये है अनमोल मिले बिना मोल
सत्य का बोल बाला हो

आप का देह नश्वर है आप आत्मा सत्य हो
ये संसार परिवर्तनशील है
इसे चलने वाला ईश्वर सत्य है
सत्य ईश्वर है सत्य सुन्दर है
सत्य ही शिव है सत्य में सब है समाया
सत्य का बोल बाला हो

सत्य में शक्ति है
सत्य में भक्ति है
सत्य में नाम है
सत्य में पहचान है
सत्य में सुख है
सत्य में शांति है
सत्य में विश्वास है
सत्य में ख़ुशी है
सत्य में सब कुछ है
तो भाई क्यों देर अब
कर लो इसकी पहचान
रंगलो इसे अपने जीवन में
सत्य का बोल बाला हो



Monday, April 21, 2014

दिल की बात कविता में - जिनके आँखों में बसा करते थे हम

जिनके आँखों में बसा करते थे हम
आज मालूम होता है वो आँखे
हमें देखना तक नहीं चाहते है
दिल में रह रह कर याद आये करते थे हम
दिल की अब क्या बात कहे
शयद वो भूल गए की कभी
उन्हें याद आया करते थे और
याद किया भी करते थे हम

वैसे इस बात का ख़याल न था हमें
आज, कल की बात नहीं कुछ महीनो से
आँखे वो हम से मिली ही नहीं
जिनके आँखों में बसा करते थे हम
आखिर उसने बिना कहें सब कहा दिया
एक कागज़ हमारे नाम छोड़ दिया
जिनके आँखों में बसा करते थे हम
आज मालूम होता है वो आँखे
हमें देखना तक नहीं चाहते है

Monday, April 7, 2014

दिल की बात कविता में - ' इस दुनिया में रहते '



इस दुनिया में रहते 
जिन से पाया जन्म
करता रहा उनकी इबादत
यु चलते सफ़र में
खुशियाँ थी मेरे पास हज़ार
इस दुनिया में रहते

समय के साथ
बदले हालात में
एक उम्र ऐसा आया
कुछ बादल यु आये
जिन के बारे में
खाबों ख्याल ना था
इस दुनिया में रहते

जिनकी करता था में इबादत
वही मुझ से हुए काफा
कल तक जिन के दिल में रहता था
आज में उनके दिल से बहार
एक ना चीज़ बन बैठा हूँ
सोच सोच कर मन घबराता
इस दुनिया में रहते

शयद ये भी इस दुनिया का
एक रवैया हो जो मोम को पत्थर
और पत्थर को मोम बनाने का
इस दुनिया का रिवाज़ येही है
यह हर व्यक्ति और वस्तु
इस बदलाव में आते रहते है
और वही मेरे साथ भी हो रहा है शयद
इस दुनिया में रहते