बिंदु जैसा रूप है तेरा सागर जैसा ज्ञान।
एक तुम्ही भगवान हो बाबा बाकी सब इन्सान।।
जिस घर में रहते हो वो है परमधाम।
उस समय आते हो जब दुनिया बनती है दुःखधाम।।
दुःखधाम को सुखधाम बनाना यही तुम्हारा काम।
सिवाय तुम्हारे कर न सकेगा कोई भी इन्सान।।
बिंदु जैसा रूप है तेरा सागर जैसा ज्ञान।
एक तुम्ही भगवान हो बाबा बाकी सब इन्सान।।
जिस रथ में आते हो वह भागीरथ कहलाये।
भोलेनाथ की सवारी वह नंदीगण कहलाये।।
ब्रह्मा तन में आ देते हो हमको ज्ञान।
खुद ही आकर खुद की तुम देते हो पहचान।।
बिंदु जैसा रूप है तेरा सागर जैसा ज्ञान।
एक तुम्ही भगवान हो बाबा बाकी सब इन्सान।।
जिस युग में आते हो वो संगमयुग कहलाये।
आदि मध्य अन्त का राज हमें समझाये।।
राजयोग सिखला के हम को बनाते हो गुणवान।
वार्ना हम तो रह जाते इस सत्य से अज्ञान।।
ब्रह्मा तन में आ देते हो हमको ज्ञान।
खुद ही आकर खुद की तुम देते हो पहचान।।
एक तुम्ही धनवान हो बाबा एक तुम्ही गुणवान बाबा।
एक तुम्ही भगवान हो बाबा बाकी सब इन्सान।।
सुरेश पवार
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