Sunday, March 9, 2014

दिल की बात कविता में - "सुखु मिला है मुझे तेरी ईबादत में"



सुखु मिला है मुझे तेरी ईबादत में
हर गम और दुःख दूर हुआ एक पल में

तेरी बाते तेरी राहे मुझे नयी दिशाए दिखाते
चलने कि रूह से परेणा मिलती है
पर बड़ा असंतोष होता हूँ तब 
जब मन का साथ नहीं मिलता। ....

सुखु मिला है मुझे तेरी ईबादत में
हर गम और दुःख दूर हुआ एक पल में

सुबह कि नयी किरणो से मिलता
मुझे एक नयी शक्ति तब लगता
जैसे में करूँगा तेरी ईबादत हर पल
वक्त के चलते फिर वाही बात
पर बड़ा असंतोष होता हूँ तब 
जब मन का साथ नहीं मिलता। ....

सुखु मिला है मुझे तेरी ईबादत में
हर गम और दुःख दूर हुआ एक पल में 



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