हर श्याम एक सुनहरी याद लेकर आती है और कुछ कहती है
सागर किनारे लोग मिलते है बैठकर अपने गम भूलते है
संज हम आपकी याद में बैठकर सुखुन पाते है
ज़िन्दगी कि श्याम कभी रंग बदल देती है
बड़े मुशकिल से बने रिस्ते भी कभी अलग हो जाते है
हमारा आपसे रिस्ता यु बना कि कई जनम से अलग थे
और ख़ुशी है कि इस जनम में हम सहज मिल गए
हर श्याम एक सुनहरी याद लेकर आती है और कुछ कहती है
श्याम कि इस वेला में तुम्हारी याद ने कुछ लिकने को कहा
इन यादो के पालो को अपने दिल में सदा के लिए संजोय रख ने
कलम लेकर लिकने लगा तो शब्दो के रंगो में खो गया
क्या लिखे कैसे लिखे कहा से सुरु करे सोचता रह गया
कागज कोरा ही था पर तुम्हारी याद कि कुमारी बढ़ाती गयी
हर श्याम एक सुनहरी याद लेकर आती है और कुछ कहती है
ये भी बड़ी अजीब इस्तीफाक़ है लिकने से पहले
प्यार और मुस्कान से भरी आपका चेहरा आ जाता है सामने
फिर सोचता हु अब लिकने कि कहा जरुरत है
बस कुछ नहीं करते निहारते रह जाते है आपको
हर श्याम एक सुनहरी याद लेकर आती है और कुछ कहती है
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