Sunday, March 9, 2014

दिल की बात कविता में - " सुखो कि खोज में आज "


सुखो कि खोज में आज 
मानव और ही दुखी दिखाई देता है 
वो इस लिए शायद उसे ही पता नहीं है
उसकी खोज या तलाश ख़त्म कब होगी
बस दौड़ रहा है एक अंधेरे सड़क पर

सुखो कि खोज में आज 
मानव और ही दुखी दिखाई देता है 
एक राज कि बात अगर समझे
तो खोज या तलाश कि जरुरत नहीं है
कुदरत ने वो सब कुछ आपको दिया है
बस उसे समझ कर जीना है
जो कुछ आपके पास है उस का उपयोग करो
और घर परिवार में समय दे
तो सुख अपने आप पाएंगे
क्यों कि ईश्वर ने ये संसार
बनाया है वो सोच समझ कर ही बनाया है

सुखो कि खोज में आज 
मानव और ही दुखी दिखाई देता है 
तो चलिए एक बार इस तरह का प्रयोग करे
जो कुछ आपके पास है उसका आनंद ले
और अनुभव करे फिर देखना
आपके मुख से ईश्वर का धन्यवाद निकलेगा
किसी ने ठीक कहा है धन्यवाद करो उसके लिए
जो है और जो नहीं उसके लिए भी धन्यवाद
ये भी एक अनोखा मन्त्र है सुख से जीने का
इस के लिए भागों नहीं रुको और अनुभव करो 

सुखो कि खोज में आज 
मानव और ही दुखी दिखाई देता है 


No comments:

Post a Comment