Wednesday, March 12, 2014

दिल की बात कविता में - " शिव की महिमा "

" शिव की महिमा "



राम नहीं कृष्णा नहीं सदा शिव 
जन्म में नहीं मरन में नहीं सदा मुक्त अवस्था में 
साकार नहीं आकार नहीं सदा निराकार में 
मनुष्य लोक में नहीं सूक्ष्म लोक में नहीं सदा ब्रह्म लोक में 
कलयुग में नहीं सतयुग में नहीं सदा संगम युग में 
आदि नहीं अन्त नहीं सदा अविनाशी 
राम अवतार में नहीं कृष्ण अवतार में नहीं सदा साकार मनुष्य तन में 
पतित नहीं पावन नहीं सदा पावन 
ना धर्म आत्मा ना महात्मा सदा परम आत्मा 
ना तो गुरु ना जगत गुरु सदा परम सतगुरु 
ना शास्त्र सुनाते ना बाइबिल सुनाते सदा गीता ज्ञान सुनाते 
ना गंगा अमृत पिलाते ना चरणा अमृत पिलाते सदा ज्ञान अमृत पिलाते 
ना कण कण वाशी ना सर्व व्यापी सदा परमधाम निवाशी  
ना अमरनाथ यात्रा सिखाते ना चारों धाम कि यात्रा सिखाते 
वो सदा रूहानी याद कि याद सिखाते 
ना आकार को याद करो ना साकार को याद करो 
सदा निराकार शिव को याद करो 


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