Tuesday, March 11, 2014

दिल की बात कविता में - " दूर हम कर न सके "

लाख कोशिश करने के बाद
जिन बुराईयों को दुनिया से
हम हटाना चाहते थे
दूर हम कर न सके

कोई बात थी कही छुपी 
जिस तक हम पहुँच न सके
हम ही नहीं औरो ने भी
कोशिश की पर
दूर हम कर न सके

बहुत प्रयास के बाद
हम हार मान कर बैठे थे
तब कुछ हलचल
हुई मेरे मन के अंदर
कोशिश अब न थी
कुछ अहसहस था 

शयद कुछ इस तरह से हुआ
में समझ गया था
जिसे में बहार से हटाने कि
कोशिश कर रहा था
बस वो मेरे अन्दर था
और मैंने अन्दर से उसे
अब हटा दिया है

एक और बात यु समझ
में मेरे आया
यहाँ हर दिन कोई न कोई 
बात आती जरुर है 
बस उसे बहार से  नहीं
अन्दर से अपने मन से 
हटाना होता है 
तब हम उसे दूर कर सकते है 



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