Friday, March 14, 2014

दिल की बात कविता में - " कब तक चुप रहना है

कब तक चुप रहना है   

बात यु तो बन न सके 
उन्हें कुछ अच्छा लगता नहीं 
 मेरा दिल भी मानता नहीं
 कब तक चुप रहना है

हर गाली कि बात यही है 
हर सुबह कि कहानी यही है 
गाली में पड़ा कचरा उठायेगा कौन 
किसे कहे कौन सुनता है  
कब तक चुप रहना है

हर घर की कहानी एक 
माँ बच्चों से कुछ कहना चाहती है 
बच्चें माँ से कुछ कहना चाहते है 
पर कैसे कहे और कैसे सुनाए 
कब तक चुप रहना है

सुनो जी मै अपनी दिल कि कहता हूँ 
कोई समझे या ना समझे 
कोई सुने या न सुने पर कहता हूँ मै 
सब से अपनी दिल कि बात 
कब तक चुप रहना है

अब छोड़ो भी तुम चुप रहना 
समय बीतता जा रहा है 
क्यों की अभी नहीं तो कभी नहीं 
कह देना जो कहना चाहते हो 
कब तक चुप रहना है
कब तक चुप रहना है


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