जब भी मैं सुबह उठता हूँ
तुम्हरी आँखों का वो नूर नज़र आता है
एक अनोखा अदृश्य शक्ति
मेरे अंदर भर देती है
मैं पूरे दिन के लिए एक ख़ुशी
और नये अहसास के साथ जी उठता हूँ
जब भी में सुबह उठता हूँ
तुम्हरी आँखों का वो नूर नज़र आता है
हज़ारो लोग है इस दुनिया में
पर तुम सब से जुड़ा हो
तुम्हरी बात अलग है
बस अब तुम मेरे हो और में तुम्हारा हूँ
जब भी में सुबह उठता हूँ
तुम्हरी आँखों का वो नूर नज़र आता है
No comments:
Post a Comment