Sunday, March 9, 2014

दिल की बात कविता में - "सुबह उठते ही क़ायल आया"


सुबह उठते ही क़ायल आया
में आपका एक सुन्दर चित्र बनाऊ 
कलम लेकर सोचने लगा मै 
कोई चित्रकार तो नहीं हूँ 
पर चित्र कला की कुछ बाते याद आयी
सुना है चित्र बनाने के लिए
पहले बिंदु बिंदु को बड़े हलके से उतारते है
जैसे वो दिखायी न दे.… … पर है
जो सिर्फ  चित्रकार को ही दिकता है
सुबह उठते ही क़ायल आया
मै आपका एक सुन्दर चित्र बनाऊ 
फिर मैंने सोचा आपका चित्र
तो मेरे मन में बसा है
जो अंदर है पर दिखायी नहीं देता है
मेरे मन में आपकी छवि बहुत
सुन्दर और साफ है
और जब चाहे तब मै उसे
निहार सकता हूँ बाते कर सकता हूँ 
और दुवा कर सकता हूँ 
सुबह उठते ही क़ायल आया
में आपका एक सुन्दर चित्र बनाऊ  

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