Monday, March 10, 2014

दिल की बात कविता में - " कभी हाँ कभी ना "


जीवन के इस सफ़र में 
कभी हाँ तो कभी ना 

कभी अपनों से कभी ग़ैरो से 
कहना ही होता है 
जीवन के इस सफ़र में 
कभी हाँ तो कभी ना 

सुबह और श्याम चाहे 
कोई हो काम या ना हो पर 
कहना ही होता है 
जीवन के इस सफ़र में 
कभी हाँ तो कभी ना 

दिन रात के इस फेरे में 
मन के इस घेरे में 
हर बार में सोच यही चलता 
कभी हाँ कभी ना
जीवन के इस सफ़र में 
कभी हाँ तो कभी ना 

बात बहुत पुरानी हो या नई 
लेकिन मन फिर भी सोचे 
कहना था जिसे हाँ उसे कहा दिया ना 
और जिसे कहना था ना उसे कहा दिया हाँ 
कहना ही होता है 
जीवन के इस सफ़र में 
कभी हाँ तो कभी ना 

जीवन के इस सफ़र में 
कभी हाँ तो कभी ना 

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