Sunday, April 27, 2014

दिल की बात कविता में ' छोटी सी ज़िन्दगानी मेरी '

छोटी सी ज़िन्दगानी मेरी 
एक रिस्ता हो प्यार का 
जहाँ बतिया हो दिल का 
जहाँ कोई शिक़वा न हो 
छोटी सी ज़िन्दगानी मेरी 

रोने की कोई बात न हो 
मुस्कुराने के बहाने हो 
गम भुलाने का मन्जर हो 
खुश मिज़ाज चेहरे हो 
छोटी से ज़िन्दगानी मेरी 

राहे चाहे कठिन हो 
चलने में मौज़ हो 
आज धुंधला सा मौसम 
कल वाही बाहार हो 
सपने सच हो न हो 
पर आँखों में हो सपना सदा 
छोटी सी ज़िन्दगानी मेरी 

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