Monday, April 21, 2014

दिल की बात कविता में - जिनके आँखों में बसा करते थे हम

जिनके आँखों में बसा करते थे हम
आज मालूम होता है वो आँखे
हमें देखना तक नहीं चाहते है
दिल में रह रह कर याद आये करते थे हम
दिल की अब क्या बात कहे
शयद वो भूल गए की कभी
उन्हें याद आया करते थे और
याद किया भी करते थे हम

वैसे इस बात का ख़याल न था हमें
आज, कल की बात नहीं कुछ महीनो से
आँखे वो हम से मिली ही नहीं
जिनके आँखों में बसा करते थे हम
आखिर उसने बिना कहें सब कहा दिया
एक कागज़ हमारे नाम छोड़ दिया
जिनके आँखों में बसा करते थे हम
आज मालूम होता है वो आँखे
हमें देखना तक नहीं चाहते है

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