Monday, April 7, 2014

दिल की बात कविता में - ' इस दुनिया में रहते '



इस दुनिया में रहते 
जिन से पाया जन्म
करता रहा उनकी इबादत
यु चलते सफ़र में
खुशियाँ थी मेरे पास हज़ार
इस दुनिया में रहते

समय के साथ
बदले हालात में
एक उम्र ऐसा आया
कुछ बादल यु आये
जिन के बारे में
खाबों ख्याल ना था
इस दुनिया में रहते

जिनकी करता था में इबादत
वही मुझ से हुए काफा
कल तक जिन के दिल में रहता था
आज में उनके दिल से बहार
एक ना चीज़ बन बैठा हूँ
सोच सोच कर मन घबराता
इस दुनिया में रहते

शयद ये भी इस दुनिया का
एक रवैया हो जो मोम को पत्थर
और पत्थर को मोम बनाने का
इस दुनिया का रिवाज़ येही है
यह हर व्यक्ति और वस्तु
इस बदलाव में आते रहते है
और वही मेरे साथ भी हो रहा है शयद
इस दुनिया में रहते





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