Thursday, April 24, 2014

दिल की बात कविता में - ' कोई सपना आया था '


कोई सपना आया था  
    

रात में सो जाता था 
माँ की लोरी सुन 
उनके ही गोद में 
मीठी तपकियो के साथ 
बचपन के वो दिन 
वो भी क्या दिन थे 
कुछ याद नहीं है  
कोई सपना आया था  


मुझे कब कुछ करना था 
मेरे साथ तो माँ का साया था 
हर पल हर लम्हा 
मैं जगाते सोते बस 
एक तस्वीर देखता 
कुछ याद नहीं है  
कोई सपना आया था  


आज माँ नहीं मेरे पास 
आज नीन्द को तरस गयी है आँखे 
बहुत कोशिश करते है सोने की 
पर वो मीठा ऐहसास 
वो मीठी तपकिया कहाँ 
शायद लगता है अब 
नया जन्म लेना होगा 
कुछ याद नहीं है  
कोई सपना आया था  


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