Thursday, February 18, 2016

जब जब गम के बादल चाह जाते मेरे आसपास..........

जब जब गम के बादल चाह जाते मेरे आसपास
तू मुझे नज़र आता है बाबा मेरे आसपास
एक बार नहीं कही बार का ये मेरा अनुभव
देह भान का ही ये खेल सारा ..
ज्ञान अमृत पिलाकर आपने कर दिया होशियार
जब जब गम के बादल चाह जाते मेरे आसपास
तू मुझे नज़र आता है बाबा मेरे आसपास
हर बार करता हूँ ये भूल अपने को भुलाने की
हर बार आपने बाबा याद दिलाया आत्मा अभिमान की
कैसे करुँ सुक्रिया बाबा तेरे नेक कर्म की
जब जब गम के बादल चाह जाते मेरे आसपास
तू मुझे नज़र आता है बाबा मेरे आसपास
अब हमने सीका जीना 
तेरी हर बात को माना
बाबा अब साथ घर है जाना ......
जब जब गम के बादल चाह जाते मेरे आसपास
तू मुझे नज़र आता है बाबा मेरे आसपास
जब जब गम के बादल चाह जाते मेरे आसपास
तू मुझे नज़र आता है बाबा मेरे आसपास


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